हरसिमरन कौर पहली भारतीय महिला हैं जिन्हें एनबीए ग्लोबल अकादमी में पहुंचने का गौरव हासिल हुआ है। हरसिमरन 2019 में भारतीय महिला टीम की ओर से एशियन चैंपियनशिप में खेल चुकी हैं। हरसिमरन को इंटरनेशनल लेवल पर पहुंचाने में उनके पिता का अहम योगदान है। हरसिमरन का कहना है जब लोग सुबह सो रहे होते थे तो मेरे पिता ग्राउंड पर मुझे कड़ा अभ्यास करवाते थे। आज इस मुकाम तक पहुंचाने में पिता की कड़ी मेहनत काम आई हैं। वह 12वीं कक्षा की छात्रा हैं और कद 6 फीट 3 इंच हैं। इनके पिता सुखदेव सिंह रेल कोच फैक्ट्री में बास्केटबॉल कोच हैं।
बचपन में पिता के साथ जाता था गोल्फ क्लब, वहीं खेलना सीखा: आदिल
आदिल बेदी ने 7 वर्ष की उम्र से ही गोल्फ खेलना शुरू कर दिया था। अपने पिता हैरी बेदी के साथ चंडीगढ़ गोल्फ क्लब में जाते थे, वहीं से इस खेल के प्रति लगाव हो गया। पहले घरेलू टूर्नामेंट में हिस्सा लेना शुरू किया। इसके बाद कड़ी मेहनत के चलते टूर्नामेंट को जीतने का सिलसिला शुरू किया। जल्द ही इंडियन गोल्फ यूनियन (आईजीयू) की मेरिट लिस्ट में पहले पायदान पर पहुंच गए।
इसके बाद देश और विदेश में अपनी काबलियत सिद्ध करते हुए आज मात्र 19 वर्ष की उम्र में प्रोफेशनल गोल्फर बन गए हैं। हैरी बेदी शुरू से ही नेशनल और इंटरनेशनल लेवल के गोल्फ टूर्नामेंट में अपने बेटे आदिल बेदी के साथ ही रहते हैं। एक कैडी के रूप में पिता अपने बेटे को खेलने में मदद करते हैं।