पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि सीआरपीसी की धारा 125 या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 के तहत अदालत को एक पक्षीय अंतरिम गुजारा भत्ता प्रदान करने की शक्ति है। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि इस लाभ के लिए आवेदक को आवेदन के साथ संपत्ति व देनदारियों का ब्योरा हलफनामे के माध्यम से सौंपना होगा। साथ ही यह भी कहा कि एक पिता या पति अपने परिवार के प्रति कर्तव्य से विमुख नहीं हो सकता।
गुरुग्राम फैमिली कोर्ट द्वारा पत्नी और बच्चे को 15 हजार रुपये प्रतिमाह एकपक्षीय अंतरिम गुजारा भत्ता के आदेश को पति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याची के वकील ने तर्क दिया था कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता के लिए दाखिल याचिका का निपटारा होने तक अंतरिम गुजारा भत्ता का कोई प्रावधान नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह एक अति आवश्यक अस्थायी व्यवस्था है। हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत के पास एक पक्षीय अंतरिम गुजारा भत्ता प्रदान करने की शक्ति है। कानून में एक पक्षीय अंतरिम भरण-पोषण देने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, लेकिन इस पर कोई रोक भी नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि बिना दूसरे पक्ष को सुने अंतरिम गुजारा भत्ता केवल असाधारण मामलों में ही दिया जाना चाहिए। साथ ही एक पक्षीय अंतरिम गुजारा भत्ता की मांग करने वाले पक्ष को अपनी याचिका के समर्थन में अपनी संपत्ति और देनदारियों का खुलासा करते हुए हलफनामा दाखिल करना होगा।
वर्तमान मामले में हाईकोर्ट ने पाया कि एक पक्षीय अंतरिम गुजारा भत्ता आदेश तब पारित किया गया जब याचिका आठ महीने से लंबित थी। फैमिली कोर्ट के लिए अंतरिम गुजारा भत्ता के लिए आदेश पारित करना चाहिए था। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया और फैमिली कोर्ट को छह सप्ताह के भीतर अंतरिम गुजारा भत्ता के आवेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।