न ही गोली लगने से घायल व केस की शिकायतकर्ता अजीत सिंह को लगी गोली के बारे में अभी तक यह पता चल पाया कि गोली किस हथियार से चली है। अदालत ने आईजी उमरानंगल द्वारा पेश घटना में घायल पुलिस अधिकारियों के मेडिकल रिकॉर्ड और अदालत में दिखाई वीडियो क्लिप का संज्ञान लेते हुए कहा कि इस घटनाक्रम के दौरान धरनाकारियों द्वारा भी पुलिस पर हमला किया गया और पुलिस की गाड़ियां फूंकी गई।
इसके अलावा घटना के समय आईजी उमरानंगल के अलावा एडीजीपी रोहित चौधरी, आईजी जतिंदर जैन, डीआईजी रणबीर सिंह खटड़ा, डीआईजी अमर सिंह चाहल भी मौके पर मौजूद थे। ऐसे में अकेले आईजी उमरानंगल को आरोपी नहीं माना जा सकता। साथ ही एसआईटी दावा कर रही है कि इस घटना के पीछे बहुत बड़ी साजिश थी लेकिन उस साजिश का कोई अता पता नहीं है।
अदालत में याचिका पर सुनवाई के दौरान उमरानंगल के वकील सतपाल सिंह सिद्धू और गुरसाहिब सिंह बराड़ ने तर्क दिया था कि कोटकपूरा गोलीकांड में पुलिस ने घटना के करीब तीन साल बाद अज्ञात पुलिस अधिकारियों पर केस दर्ज किया था जिसमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। मालूम हो कि एसआईटी द्वारा आईजी उमरानंगल को बहिबलकलां गोलीकांड मामले में भी गिरफ्तार करने की तैयारी की जा रही थी जिसके बाद उन्होंने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करके ब्लैंकेट बेल हासिल की हुई है। इसके तहत किसी अन्य केस में गिरफ्तारी से पहले उन्हें 7 दिन का नोटिस देना होगा।