हरियाणा में पिराई का सीजन शुरू होने के बावजूद नए गन्ना मूल्य निर्धारण पर कोई निर्णय न होने से किसान खफा है। किसानों ने गन्ने का दाम बढ़ाने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि 10 दिसंबर तक सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया, तो 11 दिसंबर को हरियाणा कृषि भवन में केन कमिश्नर कार्यालय के बाहर गन्नों की होली जलाई जाएगी।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने कहा कि चालू पिराई सीजन के लिए गन्ना मूल्य निर्धारण को लेकर प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसानों में प्रदेश में शासित गठबंधन की सरकार के प्रति रोष पनप रहा है।
जिसके चलते भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले आगामी 11 दिसंबर को पंचकूला स्थित कृषि विभाग के केन कमिश्नर के कार्यालय के समक्ष विरोध स्वरूप गन्ने की होली जलाने का निर्णय लिया गया है। इससे पूर्व माजरी चौक से केन कमिश्नर के कार्यालय तक सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरोध में पैदल रोष मार्च भी निकाला जाएगा।
रतनमान ने कहा कि प्रदेशभर की सभी शुगर मिले करीब दो सप्ताह से चालू हैं। लेकिन प्रदेश की गठबंधन सरकार 2019-20 के चालू पिराई सीजन के लिए गन्ना मूल्य निर्धारण के मामले को लेकर चुप्पी साधे हुए है। जबकि गन्ना उपज लागत खर्च के साथ साथ खेतिहर मजदूरों की मजदूरी बढ़ने से गन्ना खेती की लागत में लगातार वृद्धि हो रही है। जिसको लेकर किसानों में भारी रोष पनप रहा है। प्रदेशाध्यक्ष मान ने सरकार से 340 से मात्र 400 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि इससे पूर्व गत 8 नवंबर को कृषि विभाग के आला अफसरों को गन्ने का 400 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने का पंचकूला स्थित उनके कार्यालय में भाकियू की ओर से ज्ञापन भी सौंपा जा चुका है। लेकिन सरकार व कृषि विभाग की ओर से कोई जवाब नही मिला है। उन्होंने कहा कि गत वर्ष के भाजपा सरकार के शासनकाल में गन्ने के मूल्य में मात्र 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई थी। जो नाकाफी रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार की चुप्पी को तोड़ने के लिए 11 दिसंबर को प्रदेश भर से आने वाले आंदोलित किसान अपने अपने जिलों से गन्ना लेकर आएंगे। जिसे विरोध स्वरूप जला कर रोष जाहिर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गन्ना आंदोलन को लेकर प्रदेश में किसान तैयारियों में जुटे हुए है।