पंजाब विश्वविद्यालय हर साल की तरह इस बार भी नए विद्यार्थियों पर फीस का अतिरिक्त भार डालने जा रहा है। फीस बढ़ाने की सूचना छात्र संगठनों को मिली तो उन्होंने पीयू को आगाह किया है। कहा, कोविड के कारण परिवारों के पास पैसे नहीं हैं। फीस भरने में दिक्कतें होंगी। ऐसे में फीस न बढ़ाएं। यदि फीस बढ़ी तो अंजाम अलग होगा। विरोध प्रदर्शन भी होंगे और आंदोलन भी।
पीयू इस बार पांच से साढ़े सात फीसदी फीस बढ़ाने जा रहा है। 30 मई को सिंडिकेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लग जाएगी। इस एक निर्णय से पीयू के खजाने में करोड़ों आएंगे। हर साल पीयू में लगभग नौ हजार विद्यार्थी नए एडमिशन के लिए आते हैं। इसमें पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू, लद्दाख आदि क्षेत्रों से होते हैं। 50 फीसदी विद्यार्थी ऐसे होते हैं, जो सामान्य परिवारों से हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत नहीं होती।
कोरोना के कारण सभी परिवारों के लिए नौकरी का संकट खड़ा हुआ है। किसी ने कार्य किया तो किसी ने नहीं। ऐसे में फीस भरना इन परिवारों के विद्यार्थियों के लिए मुश्किल होगा और पीयू फीस अलग से बढ़ा रहा है। इसे लेकर छात्रों में आक्रोश है। एबीवीपी के अध्यक्ष हरीश गुर्जर, एनएसयूआई अध्यक्ष निखिल नरमेटा, ज्वाइंट सेक्रेटरी मनप्रीत सिंह माहल, आईसा अध्यक्ष विजय कुमार आदि ने पीयू प्रशासन से कहा है कि फीस न बढ़ाई जाए।