जींद उपचुनाव जीतने के बाद सरकार यह साबित करने में कामयाब हुई है कि सवा चार साल बाद भी सूबे की जनता भाजपा पर भरोसा कर रही है। ऐसे माहौल में इस बात के आसार प्रबल हो गए हैं कि हरियाणा में अब लोकसभा चुनाव के साथ सूबे के विधानसभा चुनाव भी करवाए जा सकते हैं। वैसे यह चुनाव अक्तूबर 2019 में होने प्रस्तावित है।
हरियाणा सरकार भले ही अभी विधानसभा चुनाव अपने समय पर ही करवाने की बात कह रही है, लेकिन सीएम ने ये संकेत दे दिए हैं कि यदि केंद्र इस विषय में कोई सलाह व सुझाव देता है तो इस बारे में सोचा जाएगा। सीएम ने कहा कि हमारा मत तो यही है कि विधानसभा चुनाव अपने समय पर हो। लेकिन इस विषय में अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व को ही करना है। उनके निर्णय के बाद ही हम विचार करेंगे।
दरअसल, प्रदेश में भी भाजपा के खिलाफ जिस तरह से विरोधी दलों में गठजोड़ और अन्य तरह की रणनीति तैयार की जा रही है, तो ऐसी स्थिति में पहली बार हरियाणा में सत्तासीन भाजपा को भी अपनी दोबारा वापसी के लिए मजबूत मोर्चाबंदी पर काम करना पडे़गा। लोकसभा के साथ सूबे के विधानसभा चुनाव करवाना भी इसी मोर्चाबंदी का हिस्सा बन सकता है।