सिविल अस्पताल में बुधवार दोपहर कोरोनाग्रस्त 26 मरीजों ने भूख हड़ताल कर दी और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक दस दिन में उनका टेस्ट करके रिपोर्ट नहीं दी जा रही है और बेवजह सिविल अस्पताल में रखा जा रहा है। उनमें किसी तरह का कोई लक्षण नहीं है।
मरीज अशोक ने बताया कि श्री गुरुनानक अस्पताल में 12 दिन में दो बार टेस्ट करके घर भेज दिया गया। जालंधर में 14 दिन से कोई सुनवाई नहीं हुई। जबकि केंद्र सरकार की गाइडलाइन जो शनिवार को रिलीज की गई है, उसमें कहा गया है कि जिस मरीज को 10 दिन हो गए हैं, उसे बिना टेस्ट घर भेज दिया जाए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार इस गाइडलाइन पर अमल नहीं कर रही है।
मामले को लेकर जब 26 मरीजों ने खाना खाने से इनकार कर दिया तो डॉक्टरों के समझाने पर खाया। डॉक्टरों ने उन्हें जल्द घर भेजने का भरोसा दिया है। इसकी बाकायदा वीडियो बनाकर सिविल अस्पताल के मरीजों ने वायरल की, जिसमें पैक्ड फूड एक कुर्सी पर पड़ा हुआ है और पानी की बोतल भी साथ पड़ी है। इस वीडियो में तमाम मरीज एक सुर में बोल रहे हैं कि वह घर जाना चाहते हैं, उनके भीतर लक्षण नहीं है।
एक मरीज पॉजिटिव मिला, एक डिस्चार्ज
सिविल अस्पताल से बुधवार को 26वीं कोरोना मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया। बस्ती दानिशमंदा के न्यू रसीला नगर की एक महिला को 23 अप्रैल को यहां भर्ती किया था। वहीं ईश्वर नगर काला संघिया रोड का एक मरीज कोरोनाग्रस्त पाया गया। उसकी दोनों किडनी में बीमारी है और ऐसी आशंका है कि किसी निजी अस्पताल में इलाज के दौरान कोरोना वायरस ने चपेट में लिया है।