नौकरी के नाम से लड़कियां देह व्यापार के दलदल में कैसे फंस जाती हैं, इस मुद्दे पर एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट सामने आई है। लड़कियों की तस्करी हरियाणा के लिए नई बात नहीं है। पहले भी इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं। असम से सबसे ज्यादा लड़कियां पारो बनाने के लिए लाई जाती हैं। इसके अलावा गरीबी का फायदा उठाकर गिरोह से जुड़़े लोग परिवार वालों को मोटी रकम का लालच देकर विभिन्न राज्यों से दिल्ली लाते हैं। वहां से उनको अलग क्षेत्र पहुंचाया जाता है।
इस संबंध में प्रदेश के पुलिस प्रमुख बीबी संधू का कहना है कि हरियाणा में लिंगानुपात की असमानता के कारण यह तस्करी की जा रही है। हरियाणा में आने वाली लड़कियों में सबसे ज्यादा असम की हैं। लिंगानुपात ठीक न होने के कारण लोग अपना वंश चलाने के लिए उन्हें खरीदते हैं। शक्तिवाहिनी के कार्यकर्ता निशिकांत कहते हैं दिल्ली एनसीआर में बंगाल, बिहार, उड़ीसा, असम व झारखंड से लड़कियां आ रही हैं।
तस्करों की ओर से इन्हें नौकरी के नाम पर लाया जाता है। जहां से वह अलग-अलग ठिकानों पर भेजी जाती हैं। हरियाणा के भिवानी, जींद, झज्जर, रोहतक, अंबाला, करनाल, कैथल आदि स्थानों पर इन्हें गांव में पारो के नाम पर बुलाया जाता है। गांव के सरपंच को पता होता है कि उनके गांव में कितने पारो हैं। उल्लेखनीय है कि असम से लड़कियों की तस्करी का मामला संसद में गूज चुका है। प्रदेश सरकार को इस पर कोई रणनीति बनानी चाहिए।