हरियाणा की अलग सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मामले में लोकसभा चुनाव से ठीक आठ दिन पहले अकाली दल के प्रधान और पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने अलग कमेटी की मांग करने वाले हरियाणा के सिखों के साथ एक घंटे से ज्यादा बात की थी। उन्होंने मांगों का हल करने के लिए एक कमेटी गठित करने का वादा किया था। यह वादा अब सिर्फ लॉलीपाप साबित हुआ है।
हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एडहॉक) के अध्यक्ष रहे जगदीश झींडा ने अमर उजाला को बताया कि गत 2 अप्रैल को अंबाला में अकाली दल प्रधान सुखबीर बादल के साथ हरियाणा के सिख नेताओं की बातचीत हुई थी। तब सुखबीर बादल के सामने उन्होंने मांग रखी थी कि हरियाणा की अलग कमेटी बनाई जाए।
सुखबीर बादल ने उनकी अलग कमेटी की मांग मानने से साफ इनकार कर दिया था मगर यह जरूर आश्वासन दिया था कि हरियाणा के सिखों की समस्याओं का हल करने के लिए वे पांच सदस्यीय कमेटी गठित करेंगे।
यह वादा किए करीब पौने दो महीने बीत चुके हैं, मगर डिप्टी सीएम ने कमेटी गठित नहीं की और न ही उन्होंने आज तक बात की। उनका वादा सिर्फ लॉलीपाप साबित हुआ। गौरतलब है कि अकाली दल ने भी गत 3 अप्रैल को बयान जारी कर अध्यक्ष सुखबीर बादल की तरफ से समस्याओं का सुखमय हल करने का वादा किया था।
बादल साहब कमेटी नहीं बनने देते तो सारा पंजाब इक्ट्ठा कर दें
जगदीश झींडा ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल अलग कमेटी गठित करने का विरोध कर रहे हैं। वे गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिले हैं। अगर गुरुद्वारा एक्ट के तहत हरियाणा सरकार अलग कमेटी गठित नहीं कर सकती तो वे गृह मंत्री से क्यों मिल रहे हैं?
इसका साफ मतलब है कि पुनर्गठन अधिनियम के तहत हरियाणा में अलग सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी गठित हो सकती है और हरियाणा सरकार ऐसा कर सकती है। उन्होंने कहा कि अकाली दल हरियाणा के सिखों और केंद्र के नेताओं को गुमराह करता रहा है। अकाली दल की नीयत में खोट है। अब उन्हें सिर्फ हरियाणा कांग्रेस से ही आस बची है।
कैथल में छह जुलाई को होने वाले सिख सम्मेलन में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को याद कराएंगे कि कांग्रेस ने घोषणा पत्र में अलग कमेटी गठित करने का वादा किया था, उसे पूरा किया जाए। वित्त मंत्री हरमोहिंदर सिंह चट्ठा को इसलिए बुलाया है क्योंकि उनकी कमेटी ने सिफारिश कर रखी है।
झींडा ने पंजाब के सीएम पर व्यंग्य कसते हुए कहा कि अगर बादल साहब दोनों राज्यों के सिखों को अलग नहीं होने देना चाहते तो पुराना पंजाब भी इक्ट्ठा कर लें। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि हरियाणा के सिखों का यह संवैधानिक अधिकार है।
सुखबीर बादल का 3 अप्रैल को जारी बयान
अकाली दल ने गत 3 अप्रैल को अमर उजाला समेत सब अखबारों को जारी बयान में सुखबीर बादल ने कहा था, ‘अकाली दल हरियाणा के सिखों के विचारों का विशेष सम्मान करता है।
हरियाणा के सिख नेता एक घंटे से ज्यादा समय तक मुझसे बात करते रहे। पार्टी बैठकर स्थानीय समस्याओं का हल जरूर करेगी। हम हरियाणा के सिखों के सारे मुद्दों का सुखात्मक हल करेंगे।’
यह है गोलक का हिसाब
हरियाणा के तत्कालीन कृषि मंत्री हरमोहिंदर सिंह चट्ठा ने हरियाणा विधानसभा में तत्कालीन विधायक निर्मल सिंह के निजी प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा था, ‘हरियाणा में 100 गुरुद्वारे हैं। इनमें से 52 एसजीपीसी के अधीन हैं। कुल संपत्ति 500 करोड़ रुपये की है। इनकी कुल जमीन 3536 एकड़ है।
सालाना आय करीब 100 करोड़ रुपये है मगर रिकार्ड में 18 करोड़ रुपये है। आठ गुरुद्वारे ऐसे हैं जिनकी सालाना 20 लाख रुपये आमदनी है, 27 ऐसे हैं जिनकी एक लाख रुपये आमदन होती है जबकि 17 अन्य गुरुद्वारों में भी आमदनी होती है।