सेक्टर 17 में हरियाणा-पंजाब के कई सारे सरकारी दफ्तर और बैंक स्कायर हैं, जो शाम होते ही बंद हो जाते हैं। प्लाजा में ही सिर्फ थोड़ी बहुत चहल-पहल रहती है। इसका एक निगेटिव इंपेक्ट है। इन जगहों का सही तरह से उपयोग हो तो हालात बदल सकते हैं। जानकार कहते हैं कि इन जगहों पर नाइट क्लब, कामर्शियल एक्टिविटीज या किड्स जोन जैसे सेक्टर विकसित किए जा सकते हैं। सेक्टर 26 में क्लबों की भरमार है। इससे वहां पर वीकेंड में ट्रैफिक कंजेशन रहता है। ऐसे में कुछ क्लबों को यहां पर भी स्थापित किया जा सकता है।
वेंडर्स का सही इस्तेमाल नहीं
यह सच है कि वेंडर्स ने कारोबारियों के व्यापार को हिट किया है। जो पर्स शोरूम में 1500 रुपये का है, वही वेंडर्स के पास 500 रूपए में बिक रहा है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि यदि सारे वेंडर्स चले गए तो यहां ग्राहकों का आना बढ़ जाएगा। विश्व का कोई ऐसा बाजार नहीं है, जहां स्टाल या वेंडर्स की गुंजाइश न हो। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि हर सामान शोरूम में नहीं मिल सकता। वहां की मार्केट का अध्ययन करने पर पाया गया कि जो शोरूम में चीजे हैं, वो वेंडर्स के पास नहीं मिलेगी और जो वेंडर्स के पास है वो शोरूम में नहीं मिलेगा। खास बात यह है कि उनके तय स्थान और तय समय भी है।
आधुनिक और सस्ता फूड कोर्ट का न होना
सेक्टर 17 में कोई भी फूड कोर्ट नहीं है, जो हैं वे काफी महंगे हैं। सिवाए इंडियन कॉफी हाउस को छोड़कर। हर टूरिस्ट स्पॉट और सिटी सेंटर बिना फूड कोर्ट के अधूरे हैं। एलांते का उदाहरण ले सकते हैं। सेक्टर 17 में इतना ज्यादा स्पेस है कि वहां पर आधुनिक और सस्ते फूड कोर्ट को विकसित किया जा सकता है। इससे लोगों का आना-जाना बढ़ेगा और लोग इसका लुत्फ भी उठा सकेंगे। साल 2013 में इस बारे में चंडीगढ़ प्रशासन के पास एक प्रपोजल भी भेजा गया था।
इसमें कोई शक नहीं कि सेक्टर 17 को अविकसित करने में चंडीगढ़ प्रशासन का अहम रोल रहा है। अधिकारी आते और चलते बनते। पूर्व एडवाइजर विजय कुमार देव ने सेक्टर 17 को संवारने के लिए प्लान तैयार करवा रहे कि उनका ट्रांसफर हो गया। ऐसे कई अधिकारी आए, जिन्होंने सतारा के पुराने दिन लौटाने की कोशिश की, लेकिन जब तक कुछ बात बनती, तब तक उनका बोरिया-बिस्तर बंधने लगा। यह एक बड़ा मुद्दा और इसके समाधान की दिशा में कोई काम नहीं होता।
समय के साथ पिछड़ना
विश्व की कई मार्केट ऐसी हैं जो सौ साल पुरानी है, लेकिन वे आधुनिकता के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। अधिकत्तर मार्केट की अपनी वेबसाइट है, जिसमें मार्केट के हर सेग्मेंट का विस्तार से ब्योरा अपलोड है। वेबसाइट के माध्यम से मार्केट की एक तस्वीर उभरती है, इससे शापिंग करना आसान होता है, लेकिन सेक्टर 17 की ऐसी कोई वेबसाइट नहीं है। मार्केट में लोगों को लुभाने के लिए कई सारी एक्टिविटीज की जाती है, ताकि लोग आए और खरीदारी भी करें, लेकिन सेक्टर 17 में इस तरह की एक्टिविटीज बंद है।
इस्ताबुल के 400 साल पुराने बाजार में सब कुछ
इस्ताबुल का ग्रेंड बाजार करीब 400 साल पुराना होने के बावजूद आज भी गुलजार रहता है। 30700 स्कवायर मीटर वाले इस बाजार में चार हजार से ज्यादा दुकाने हैं। बाजार में रोजाना ढाई से चार लाख विजिटर्स आते हैं। करीब पांच सौ स्टॉल यानि वेंडर्स भी हैं। यह बाजार मुख्य रूप से ज्वेलरी, प्राचीन सामान, कपड़े, सजावट का सामान सहित अन्य सामान के प्रसिद्ध है।
कहा जाता है कि खाने और पीने के शौकीन हर व्यक्ति को इस बाजार में जरूर जाना चाहिए। दरअसल यहां पर सभी पुराने और आधुनिक फूड उपलब्ध हैं। यदि मोलभाव आता है तो खरीदारी का अच्छा मौका होता है। पर्यटकों को लुभाने के लिए सुंदर-सजी दुकाने, आधुनिक ब्रैंड और बेहतरीन फूड कोर्ट उपलब्ध है।
आस्ट्रेलिया के मेलबोर्न में स्थित क्वीन विक्टोरिया मार्केट की नींव 1878 में रखी गई थी। यह मार्केट पूरी तरह से डिजाइन और वेल मैनेज्ड है। मार्केट में सब्जियां, फल, कपड़े, ज्वेलरी, खिलौने और फूड कार्नर के अलग-अलग सेग्मेंट हैं। नाइट मार्केट का भी विकल्प मौजूद है। खरीदारी पर बैग और गिफ्ट बाउचर ग्राहकों दिए जाते हैं।
बाजार में किड्स कार्नर हैं। फ्रेश सामान खरीदना है तो उस सामान को बेचने और खरीदारी का समय तय है। मार्केट में पहुंचते ही ग्राहकों को फ्री वाइफाई उपलब्ध होता है। विजिटर्स हब में मार्केट से संबंधित सभी जानकारियां उपलब्ध हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि मार्केट की एक वेबसाइट है। इसमें ग्राहकों को टायलेट से लेकर हर छोटी बड़ी चीजों की जानकारी है। पार्किंग और दुकानों तक पहुंचने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का भी बेहतर इंतजाम है।
लंदन की इस मार्केट में खाना, पीना, शापिंग और डांस
लंदन का कैम्डेन मार्केट सिर्फ पांच दशक पुराना है, लेकिन इस मार्केट में वो सबकुछ उपलब्ध है, जो टूरिस्ट को लुभाने और बार-बार आने पर उन्हें मजबूर कर सकता है। मार्केट की नींव 1974 में रखी गई थी। यहां पर स्ट्रीट फूड वेंडर्स, इंडिपेंडेंट शोरूम, बेहद आधुनिक फूड कोर्ट, जिसमें खाने-पीने की तमाम वैराइटियां हैं। इस मार्केट की खास बात यह है कि मार्केट में कई सारे इवेंट आयोजित किए जाते हैं, जिससे बाजार में रौनक बनी रहती है।
अधिकतर आयोजनों में लोगों के लिए फ्री इंट्री रहती हैं। क्रिसमस का त्योहार को लेकर मार्केट में जबरदस्त कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। यहां पर बैंड और म्यूजिक्ल प्रोग्रामों के लिए बेहतरीन मंच भी उपलब्ध कराए जाते हैं। मार्केट की सभी जानकारियों और आने वाले कार्यक्रमों की जानकारी मार्केट की वेबसाइट में उपलब्ध है।
वाशिंग्टन के सबसे बड़े शहर सीएटल में स्थित पब्लिक मार्केट सेंटर करीब सौ साल से ज्यादा वक्त का पुराना बाजार है। इसकी नींव 1907 में रखी गई थी। इस बाजार की खासियत यही है कि यहां पर छोटा से लेकर बड़ा खरीददार आता है। मार्केट में ज्वेलरी, हेल्थ न्यूट्रीशियन, बच्चों के खिलौने, किताबे, कॉमिक्स की स्टाल और दुकाने हैं।
एक बेहतरीन फूड कोर्ट है, जिसमें पास्ता, वाइन, फ्रेश फिश, चाकलेट, चीज, काफी की अनगिनत वैराइटियां हैं। रेस्टोरेंट की एक लंबी लिस्ट है। इस मार्केट की अपनी एक वेबसाइट है, जो अपने ग्राहकों और दूर देशों से घूमने आने वाले लोगों को एक क्लिक पर एक अद्भुत जानकारियां उपलब्ध कराती हैं। इवेंट आयोजित करने के लिए बेहतरीन हाल भी उपलब्ध हैं।
नाइट फूड स्ट्रीट का प्रपोजल भेजा था, ठंडे बस्ते में रख दिया प्रस्ताव
सेक्टर 17 के विकास को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन उदासीन है। यहां पर टूरिस्ट को लुभावने के लिए कुछ भी नहीं है। मैंने साल 2013 में लाहौर की तर्ज पर यहां पर एक नाइट फूड स्ट्रीट का प्रपोजल दिया था। सतारा में नगर निगम की 32 दुकाने हैं, जो बंद पड़ी है। यदि वहां पर आधुनिक और सस्ता फूड कोर्ट खोला जाए तो लोगों का आना शुरू होगा।
विश्व की जो पुरानी और माडर्न मार्केट है, सभी में एक फूड कोर्ट है। जहां पर लोग अच्छे खाने पीने का लुत्फ उठा सकते हैं। इसके अतिरिक्त यहां पर इंटरटेनमेंट के लिए कुछ नहीं है। विदेशों में वीकेंड पर बैंड, म्यूजिकल नाइट, लेजर शो सहित कई मनोरंजन के साधन है। साल 2003 के वक्त जब मैं मेयर था, तब दीवाली मेले का आयोजन किया था। अब तो इस तरह के आयोजन बंद हो चुके हैं। सेक्टर 17 का जब तक हॉलिस्टिक विकास नहीं होगा तब तक इसके पुराने दिन वापस नहीं आ सकते। - सुभाष चावला, पूर्व मेयर व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता
सेक्टर 17 सिटी सेंटर की तर्ज पर विकसित हो
सेक्टर 17 के विकास के लिए एक दूरगामी नीति की जरूरत है। ऐसा नहीं है कि वेंडर को हटा देने से सेक्टर 17 में रौनक लौट आएगी। कुछ तो वेंडर होने चाहिए। लेकिन उनकी जगह तय हो। वे शोरूमों के सामने न बैठे हो। क्योंकि जब तक वेंडर नहीं होंगे, तब तक आम नागरिक वहां पर नहीं आएंगे। इसके साथ ही सेक्टर 17 का एक हिस्सा जिसमें बैंक और सरकारी दफ्तर हैं, वो शाम होते ही सुनसान हो जाते हैं।
यहां पर बहुत कुछ करने की गुंजाइश है। जिस तरह से सुखना पर झूले और बच्चों के मनोरंजन के लिए एडवेंचर्स उपलब्ध है, वैसा ही कुछ सेक्टर 17 में होना चाहिए। एलांते में लोग क्यों जाते है, क्योंकि वहां उन्हें घूमने का एक माहौल मिलता है। शापिंग भले ही कुछ न करे, लेकिन उन्हें घूमने का एक माहौल मिलता है। आपने देखा होगा कि जब माल्स से लोग लौटते हैं तो बहुत कम लोगों के हाथों पर शापिंग बैग होता है। सेक्टर 17 में काफी क्षमता है, उसे शापिंग सेंटर के साथ टूरिस्ट स्पॉट के तौर पर विकसित करें।-दीपिका गांधी, डायरेक्टर ली-काबूर्जिए सेंटर