राजनीतिक दृष्टि से मालवा शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। इसके बाद भी 2017 में पारंपरिक गढ़ में दोनों दलों को सिर्फ आठ सीटों पर विजय मिल पाई, जबकि कांग्रेस ने 40 सीटों पर कब्जा कर कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में सरकार बनाई। आप को 18 सीटों के साथ संतोष करना पड़ा।
मालवा में पंजाब के 15 जिले
पंजाब के कुल 23 जिलों में 15 जिले मालवा के हैं। इनमें फिरोजपुर, मुक्तसर, फरीदकोट, मोगा, लुधियाना, मलेर कोटला, बठिंडा, मानसा, संगरूर, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, एसएएस नगर, रोपड़, बरनाला और फाजिल्का शामिल हैं। सबसे बड़ा भौगोलिक क्षेत्र होने के साथ ही यहां के किसान सबसे अधिक कपास उगाते हैं।
मलेरकोटला सबसे नया जिला
पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मालवा के मलेरकोटला को जिले का दर्जा दिया था। इसके बाद भी यहां समस्याएं जस की तस हैं। सरकारी योजनाओं का अच्छा क्रियान्वयन न होने के कारण मलेरकोटला में जमीनी स्तर पर ज्यादा काम नहीं हो पाया। यही वजह है कि यहां नशे की दवाओं के खतरे और बढ़ती बेरोजगारी के अलावा, सड़क का बुनियादी ढांचा अभी भी खराब हालात में है। पिछले 30 वर्षों से सत्ता में पारंपरिक दल जल-जमाव की समस्या को हल करने में भी विफल रहे हैं।
दलितों और किसानों का मिश्रण
मालवा बेल्ट किसानों और दलितों का मिश्रण है। यहां धर्म अभी महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र के दो जिले बठिंडा और मानसा के लोगों को राजनीतिक दल मूक मतदाता कहते हैं। यह उम्मीदवारों के लिए चुनाव के समय परेशानी खड़ी करते हैं। इस बार यहां कांग्रेस, शिअद-बसपा, भाजपा-पीएलसी-शिअद (संयुक्त), आप और संयुक्त समाज मोर्चा (एसएसएम) गठबंधन के बीच मुकाबला है।