चंडीगढ़। यूटी प्रशासन ने आम आदमी पार्टी को चंडीगढ़ में दफ्तर के लिए जगह आवंटित करने से इन्कार कर दिया है। इसके बाद से आप के नेता प्रशासन के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। पूर्व मेयर व आप नेता प्रदीप छाबड़ा ने कहा है कि शहर में जमीन आवंटन के नियम हर पार्टी के लिए अलग कैसे हो सकते हैं। वहीं, आप के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने इसे भेदभाव वाला फैसला बताया है।छाबड़ा ने कहा है कि आप मौजूदा समय में चंडीगढ़ की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। प्रशासन उसे चंडीगढ़ में जमीन देने से मना नहीं कर सकता। चंडीगढ़ नगर निगम में पार्टी के 13 पार्षद है। चंडीगढ़ में कई ऐसे राजनीतिक दलों को भी पार्टी कार्यालय के लिए जमीन मिली हुई है, जिनका शहर में कभी भी सांसद नहीं बना। छाबड़ा ने प्रशासन से भवन आवंटन के नियमों में बदलाव करने की मांग की। प्रशासन भाजपा के दबाव में काम कर रहा हैं। चंडीगढ़ में भाजपा और कांग्रेस की पंजाब इकाई के साथ-साथ चंडीगढ़ ईकाई को भी अलग से पार्टी कार्यालय के लिए जगह मिली हुई है।
चंडीगढ़ में अकाली दल का कभी कोई सांसद नहीं जीता, फिर भी जमीन दी है। अगर प्रशासन उन्हें पार्टी कार्यालय के लिए जमीन नहीं दे सकता तो फिर नगर निगम की बैठक में प्रस्ताव लाकर वह इसकी मांग करेंगे। निगम के पास मौजूद जमीन में से आप की चंडीगढ़ इकाई को पार्टी कार्यालय के लिए जमीन आवंटित की जाए।
क्या अकाली दल या सीपीएम ने शर्तें पूरी की : प्रेम गर्ग
आप नेता प्रेम गर्ग ने प्रशासन के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण और राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को पार्टी के आवेदन पर निर्णय लेते समय निष्पक्षता से काम करना चाहिए था। आप अब पंजाब में 92 विधायकों के साथ एक राष्ट्रीय पार्टी है, जो राज्य में अब तक किसी भी पार्टी के विधायकों से अधिक है। आप 13 पार्षदों के साथ चंडीगढ़ में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है। आप के 7 राज्यसभा सदस्य और पंजाब से 1 लोकसभा सदस्य हैं। यह है कि आप के पास चंडीगढ़ से कोई निर्वाचित सांसद नहीं है, सही नहीं है, क्योंकि शिअद और सीपीएम दोनों के पास चंडीगढ़ से कभी भी कोई सांसद नहीं था, लेकिन इन दोनों पार्टियों को चंडीगढ़ में अपने कार्यालयों के लिए जमीन आवंटित की गई थी। भाजपा और कांग्रेस दोनों की पंजाब इकाइयों के कार्यालय चंडीगढ़ में हैं, जबकि इन दोनों पार्टियों की चंडीगढ़ इकाइयों के भी शहर में अलग-अलग कार्यालय हैं।