फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजाबः सुनाम में मकान की छत गिरने से परिवार के चार सदस्यों की मौत, तीन गंभीर घायल

Sun, 08 Mar 2020 09:52 AM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर)
विज्ञापन
मकान की छत गिरी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
ओलंपिक स्टेडियम से नजदीक कमरे की छत गिरने से परिवार के चार सदस्यों की मलबे में दबकर मौत हो गई। मृतकों में दीपक कुमार (27), उसकी पत्नी जानवी (25) और उनके दो बेटे अभि (9) व नवी (7)  शामिल हैं। इसी कमरे की छत पर टेंट लगाकर सो रहे दीपक के पिता बलवीर चंद, माता कृष्णा देवी और विवाहित बहन रेखा घायल हो गए।
विज्ञापन


 एक दिन पहले ही रेखा अपने मायके आई थी। अनुमान है कि पिछले दो दिन से हुई बारिश के कारण छत कमजोर हो गई थी। छत के गीला होने से भार बढ़ गया। शनिवार की सुबह ही परिजनों ने छत पर मिट्टी भी डाली थी। बताया जाता है कि रात को करीब 12 बजे रेलवे ट्रेक पर ट्रेन के गुजरते वक्त धमक के साथ छत अचानक गिर गई। इलाका रेलवे लाइन से कुछ गज दूरी पर है। 
 
रविवार की रात करीब 12 बजे अचानक छत धमाके के साथ गिर गई। पड़ोसियों ने सभी को मलवे से बाहर निकालकर सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया। डाक्टरों ने दीपक, जानवी व उनके दोनों बेटों को मृत घोषित कर दिया। तीनों घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है।
विज्ञापन


डीएसपी सुखविंदरपाल सिंह, एसएचओ जतिंदरपाल सिंह, नायब तहसीलदार अमित कुमार ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। वार्ड के पार्षद ऋषीपाल ने बताया कि हादसे की खबर लगते ही पूरी टीम के साथ पहुंचे और मलबे में दबे सभी सदस्यों को सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। विधायक अमन अरोड़ा भी सरकारी अस्पताल में पहुंचे और पीड़ित परिजनों से संवेदना जताई।
विज्ञापन

बच्चों को शिक्षित करके बडे़ पदों तक पहुंचाने के थे अरमान

वर्षों से संजोए सपने पलभर में टूटे ही नहीं बल्कि सपने देखने वाला पूरा परिवार ही मौत के आगोश में समा गया। रविवार को सुनाम के ओलंपिक स्टेडियम से सटी बस्ती में हुए हादसे ने सभी को झकझोर दिया है। बुजुर्ग दंपति बलवीर चंद व कृष्णा देवी पर मुसीबतों का पहाड़ कहर बनकर टूट पड़ा है। बेटा, बहू व दो पोतों की मौत से वह पूरी जिंदगी उभर नहीं पाएंगे। बलवीर चंद खुद भी मजदूरी का काम करते हैं। घटनास्थल परिवार के संघर्षमय जीवन की दास्तां भी बया करता प्रतीत हो रहा था। साथ ही गरीबी का मंजर भी चारों तरफ दिखाई दे रहा था।

मात्र एक कमरे के घर में बच्चे की साइकिल, खिलौने, टीवी, फ्रिज, राशन के डिब्बे, सोफा, बैड आदि परिवार के जीवन के संघर्ष के हरेक पहलू की कहानी सुना रहे थे। कमरे की दीवार पर निरंकारी मिशन के पैरोकारों की तस्वीरें इस परिवार की धार्मिक आस्था का प्रमाण दे रही थीं। दीपू कुमार फर्नीचर पर पालिश करने का काम करता था। उसकी पत्नी जानवी आशा वर्कर की सहायक थीं। जानवी अपने दोनों बच्चों को शिक्षित करके बडे़ पदों पर देखना चाहती थीं और रोजाना खुद बच्चों को पढाती थी।

पड़ोसी मुरारी लाल, नरेश कुमार, बिट्टू ने बताया कि आसपास के बच्चों रो भी शिक्षा के लिए जानवी प्रेरित करती थीं। सेहत संभाल के प्रति लोगों को जागरूक करने और सरकारी योजनाओं का लाभ लाभपात्रियों तक पहुंचाने का काम करने वाली जानवी जुझारू महिला थीं। गरीबी की मजबूरी ने इस परिवार के सपनों को ही नहीं बल्कि पूरे परिवार को ही लील लिया है। आप के नेता व विधायक अमन अरोड़ा ने कहा कि हादसा अपने पीछे कई गंभीर सवाल छोड़ गया है।

देश को विश्व शक्ति बनाने का दावा किया जा रहा है लेकिन लोगों को सुरक्षित छत तक नसीब नहीं हो रही है। कम से कम लोगों को बुनियादी सहूलतें रोटी, कपड़ा और मकान तो मुहैया कराया जाए। दशकों से सरकारें गरीबों को मकान देने का दावा कर रही हैं लेकिन यहां के हादसे ने इन तमाम दावों की पोल खोल दी है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें