सोलर सिटी बनाने के लिए प्रशासन अब सख्ती करेगा। ढाई सौ वर्ग फुट और इससे अधिक जगह में बने मकानों के नक्शे अब तभी पास होंगे, जब उनमें सोलर सिस्टम लगा होगा। बिल्डिंग बायलॉज के फेर में फंसे रहने वाले चंडीगढ़ वासियों के लिए इसके साथ ही एक नई शर्त और आ गई है।
शहरी विकास मंत्रालय की चिट्ठी के बाद प्रशासन ने फैसला किया है कि ऐसे घरों के नक्शे पास नहीं किए जाएंगे, जिनमें रूफ टॉप सोलर सिस्टम नहीं होगा। मॉडल बिल्डिंग बायलॉज के तहत यह नया सिस्टम अपनाया जाएगा। प्रधानमंत्री कार्यालय से भी प्रोजेक्ट पर रिपोर्ट मांगी है।
एमओयूडी की चिट्ठी केबाद प्रशासन ने मॉडल बिल्डिंग बॉयलॉज की प्लानिंग को लगभग अंतिम रूप भी दे दिया है। बहुत जल्द नई प्रक्रिया के तहत ही घरों के नक्शे पास होने लगेंगे। वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की भी अप्रूवल लेनी होती है।
दरअसल देशभर में हरियाणा ने सबसे पहले इस नए सिस्टम को अपने यहां लागू किया है। वहां 500 स्क्वेयर फुट और उससे बड़े हर मकान पर सोलर सिस्टम लगाना अनिवार्य है। बिना इसके नक्शा पास ही नहीं होता। इसी कान्सेप्ट पर एमओयूडी ने मॉडल बिल्डिंग बॉयलॉज अपनाने केलिए चिट्ठी भेजी है।
यह है केंद्र की चिट्ठी
केंद्र सरकार ने जो चिट्ठी भेजी है उसमें 100 वर्ग फुट से बड़े सभी मकानों पर सोलर सिस्टम अनिवार्य करने की सलाह दी है। हालांकि हर स्टेट या यूटी अपनी इच्छा अनुसार इसका क्राइटीरिया तय कर सकते हैं। चंडीगढ़ प्रशासन इस नए सिस्टम की शुरुआत 250 स्क्वेयर फुट के मकानों से करने जा रहा है। इसके बाद मकानों में सोलर वॉटर हीटर लगाना भी अनिवार्य होगा।
मॉडल बिल्डिंग बायलॉज के तहत मकानों केनक्शे सोलर सिस्टम लगाने केबाद ही पास होंगे। केंद्र सरकार के निर्देश केबाद यह नया सिस्टम चंडीगढ़ प्रशासन अपनाने जा रहा है। 250 वर्ग फुट के मकानों से इसकी शुरुआत करने पर विचार कर रहे हैं।
-संतोष कुमार, डायरेक्टर, चंडीगढ़ रिन्यूअल एनर्जी साइंस एंड टेकभनोलॉजी (क्रेस्ट)