हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित न किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। एक ओर जहां हुड्डा ने कहा कि उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया था वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि उन्हें निमंत्रण न मिलना हास्यास्पद है।
उधर सरकार के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि रोहतक के उपायुक्त कार्यालय की ओर से हुड्डा और सांसद दीपेंद्र हुड्डा को उनके निवास पर 25 अक्तूबर को निमंत्रण-पत्र भेजा गया था।
इस संबंध में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता वीरकुमार यादव ने कहा कि शपथ ग्रहण कार्यक्रम भाजपा द्वारा नहीं बल्कि राजभवन की ओर से आयोजित किया गया था। हमें पुख्ता जानकारी है कि शपथ ग्रहण समारोह के लिए हरियाणा के सभी 90 विधायकों एवं लोकसभा व राज्यसभा सांसदों को आमंत्रित किया गया था।
यादव ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा कि जब नेता विधायक दल इनेलो के अभय चौटाला और कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय विधायक जयप्रकाश सूचना के उपरांत कार्यक्रम में शिरकत कर सकते हैं तो भला राजभवन को हुड्डा से क्या नराजगी थी कि निर्वतमान एवं कार्यकारी मुख्यमंत्री को निमंत्रण पत्र ही नहीं भेजा।
यादव के अनुसार हुड्डा ने कार्यक्रम का बहिष्कार कर न केवल लोकतांत्रिक परंपराओं को तोड़ा है बल्कि राजभवन जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है।
निमंत्रण-पत्र भेजा गया था
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित न किए जाने के मामले में सरकार के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि रोहतक के उपायुक्त कार्यालय की ओर से हुड्डा और सांसद दीपेंद्र हुड्डा को उनके निवास पर 25 अक्तूबर को निमंत्रण-पत्र भेजा गया था।
उपायुक्त कार्यालय के कर्मचारी ने निमंत्रण दोपहर एक बजे दिया था। शपथ ग्रहण समारोह में हुड्डा के लिए मंच पर एक कुर्सी अलग से आरक्षित भी की गई थी। चंडीगढ एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए गणमान्य व्यक्तियों के नामों की सूची में हुड्डा का नाम भी शामिल था। उधर, भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शपथ ग्रहण समारोह के बाद कहा कि उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया था।