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Chandigarh News: कॉलोनाइजर को लाइसेंस व सीएलयू मामले में हुड्डा को हाईकोर्ट से झटका

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कॉलोनाइजर को लाइसेंस व सीएलयू मामले में हुड्डा को हाईकोर्ट से झटका
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-कहा- सरकार ने ढींगरा आयोग के कार्य को किया था समाप्त, आयोग आज भी अस्तित्व में

-हरियाणा सरकार चाहे तो आयोग को रख सकती है जारी, अभी आयोग का उद्देश्य नहीं हुआ पूरा

-भूपेंद्र सिंह हुड्डा की याचिका का आठ साल बाद हुआ निपटारा, 2016 में हुई थी दाखिल

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ढींगरा आयोग को चुनौती देने वाली याचिका पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को झटका देते हुए आयोग के गठन को सही माना है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार ने आयोग को समाप्त नहीं किया था, केवल उसके कार्य को समाप्त माना था, ऐसे में आयोग आज भी अस्तित्व में है। सरकार चाहे तो आयोग को जांच आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दे सकती है। हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी करते हुए हुड्डा की 8 साल पुरानी याचिका का निपटारा कर दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने याचिका दाखिल कर कहा था कि कमिशन ऑफ इंक्वायरी एक्ट के सेक्शन 3 के तहत ही जांच का आदेश दिया जा सकता है। इसके लिए जांच का विषय कैबिनेट के सामने रखना अनिवार्य होता है जो नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ने यह निर्णय अकेले लिया है और यह भी नहीं बताया कि ऐसी क्या विषय वस्तु उनके पास थी, जिसके आधार पर जनहित में कमिशन का गठन करना अनिवार्य था। मुख्यमंत्री ने महज एक नोट लिखकर फैसला ले लिया जो उनके अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या महज अखबारों में छपी सुर्खियों के आधार पर आयोग का गठन किया जा सकता है।
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हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि आयोग का गठन 2015 में हुआ था और उसने अपनी रिपोर्ट 31 अगस्त 2016 में दी थी। राज्यपाल ने 2 सितंबर 2016 को आयोग का कार्य समाप्त होने की अधिसूचना जारी की थी, लेकिन आयोग को समाप्त करने के लिए सेक्शन 7 की नोटिफिकेशन नहीं जारी की गई थी। यह नोटिफिकेशन जारी न होने के चलते आयोग आज भी अस्तित्व में है, भले ही वह निलंबित अवस्था में है। इसके साथ ही आयोग ने जो रिपोर्ट सौंपी थी, वह मंजूर नहीं हुई और ऐसे में यह भी नहीं कहा जा सकता कि आयोग का काम पूरा हो चुका है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने हुड्डा की याचिका का निपटारा कर दिया और आयोग को सही और वर्तमान में प्रभाव में करार दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार चाहे तो आयोग को जांच आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दे सकती है। आयोग यदि जांच आगे बढ़ाता है तो पहले हुड्डा को सेक्शन 8 के तहत नोटिस दिया जाए ताकि वे अपना बचाव कर सकें।
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राय बंटने की वजह से 2019 में टल गया था फैसला

जस्टिस एके मित्तल व जस्टिस अनुपेंद्र ग्रेवाल दोनों ने अपने फैसले में कहा है कि ढींगरा आयोग ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को जांच में शामिल होने के लिए जो नोटिस भेजा था कि कमीशन ऑफ इन्क्वायरी एक्ट की धारा-8 बी के तहत नहीं था। लेकिन दोनों की इस मामले में आगे क्या संभावना है, उस पर राय अलग रही। जस्टिस मित्तल ने कहा कि आयोग जांच के लिए नए सिरे से हुड्डा को नोटिस जारी कर सकता है तो जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल ने कहा कि आयोग का कार्यकाल 31 अगस्त 2016 को खत्म हो चुका है और ऐसे में उसे नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं है। सरकार चाहे तो नए आयोग का गठन कर सकती है।
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