उसे इन दंगों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बावजूद इसके उसे इन दंगों की साजिश का आरोपी बना दिया गया। हनीप्रीत ने याचिका में बताया है कि इन दंगों की साजिश रचने को लेकर 27 अगस्त 2017 को शिकायत दर्ज करवाई गई थी। तब शिकायत सिर्फ आदित्य इंसा और सुरिंदर धीमान के खिलाफ ही दर्ज की गई थी।
इसके बाद 7 सितंबर को डेरामुखी के गनमैन कांस्टेबल विकास कुमार के बयान दर्ज किए गए, जिसमें पहली बार याचिकाकर्ता का नाम आया कि उसने आदित्य इंसा सहित अन्य के साथ 17 अगस्त 2017 को डेरे में बैठक की थी। शिकायत में बताया था कि अगर 25 अगस्त को सीबीआई कोर्ट डेरामुखी के खिलाफ कोई भी फैसला सुनाती है तो वह दंगे करवा इन दंगों की आड़ में डेरामुखी को वहां से निकालने में मदद करेगी।
इसके बाद 3 अक्तूबर 2017 को उसने पुलिस के समक्ष समर्पण कर दिया था, तभी से वह न्यायिक हिरासत में है। इस मामले में उसे गलत तरीके से फंसाया गया है और वह पिछले डेढ़ साल से जेल में है। इस केस का ट्रायल चल रहा है, जिसमें 52 गवाह बनाए गए हैं। ऐसे में उसे तब तक जेल में न रखा जाए और उसे जमानत दी जाए।