कुलेरी गांव में लगातार चार दिनों तक होली का उत्सव मनाया जाता है। गांव में महिलाएं बच्चे ही नहीं हर उम्र के लोग खुलकर होली मनाते हैं। आपसी भाईचारा ऐसा कि भीड़ में कहीं भी सुरक्षाकर्मी या पुलिस कर्मी नजर नहीं आता। यहां किसी भी प्रकार की हिंसा या मारपीट की घटना नहीं हुई है।
अग्रोहा के गांव कुलेरी में होली का त्योहार पारंपरिक अंदाज में सामूहिक तौर पर मनाया जाता है। आयोजन में गांव की सभी महिलाएं और पुरुष हिस्सा लेते हैं।
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फाग खेलने वाली महिलाओं को पीतल की टोकनी देकर सम्मानित किया जाएगा। वहीं दूसरे गांव से आने वाले महिला पुरुषों को किराया तक दिया जाता है। यहां होली पर जाति धर्म की सारी दीवारें खत्म हो जाती हैं। कुलेरी गांव की होली की तुलना वृंदावन की होली से होती है।
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गांव के रामस्वरूप, राजेश भाकर ने बताया कि पूर्व सरपंच राजेंद्र मिठारवाल की पुत्रवधू मनीषा निठारवाल जब सरपंच चुनी गई थी तब उन्होंने ही गांव में यह अनोखी शुरुआत कराई थी।
कुलेरी गांव में लगातार चार दिनों तक होली का उत्सव मनाया जाता है। गांव में महिलाएं बच्चे ही नहीं हर उम्र के लोग खुलकर होली मनाते हैं। आपसी भाईचारा ऐसा कि भीड़ में कहीं भी सुरक्षाकर्मी या पुलिस कर्मी नजर नहीं आता। यहां किसी भी प्रकार की हिंसा या मारपीट की घटना नहीं हुई है। होली से एक दिन पहले शाम से ही निर्धारित मुख्य चौक बाबा रामदेव चौक नजदीक साईं लोका मंदिर पर लोहे की कढ़ाई को पानी से भर दिया जाता है। इसमें देवर भाभी के बीच जीत के निर्णय को लेकर अंपायर भी होता है। महिलाएं कोरड़े बरसाती हैं वहीं पुरुष उन पर पानी डालते हैं। डीजे पर हरियाणवी संगीत चलता रहता है। फाग उत्सव में पूर्व सरपंच मनीषा भीतरवाल भी भाग लेती है। सबसे ज्यादा देर तक फाग खेलने वाली महिलाओं को आकर्षक इनाम दिया जाता है।
देवर भाभी के बीच जीत की लगती है होड़
पूर्व सरपंच प्रतिनिधि राजेंद्र मिथवाल ने बताया कि कुलेरी की होली का विहंगम नजारे लोगों का न सिर्फ मन मोह लेते है बल्कि पूरे समाज को एक अलग संदेश देते हैं। फाग उत्सव में गांव के चौक में लोहे की कढ़ाई में पानी भरकर हर उम्र के देवर भाभी के बीच पानी फेंक खेल में जीतने वाले को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता है। खेल में नशा पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है।