चंडीगढ़ में एचआईवी मरीजों में काफी तेजी से कमी आई है। यह जानकारी बुधवार को यूटी प्रशासन के हेल्थ विभाग की ओर से आयोजित एक प्रेस वार्ता में दी गई। जानकारी अनुसार प्रेगनेंट महिलाओं में एचआईवी का प्रतिशत तेजी से कम हो रहा है।
जानकारी अनुसार चंडीगढ़ में 2008 में 0.27 फीसदी ग्राफ 2015 तक 0.11 फीसदी तक नीचे गिरा है। एचआईवी एड्स को लेकर चंडीगढ़ में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एजुेकशन(नाइन) और पीजीआई 26 और 27 फरवरी को दो दिवसीय नेशनल एड्सकॉन-2016 नेशनल कांफ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।
जानकारी अनुसार पीजीआई में पहली बार एचआईवी पर इस तरह की कांफ्रेंस आयोजित की जा रही है। यूटी के डायरेक्टर हेल्थ एजुकेशन डा.वीके गुगनेजा और चंडीगढ़ स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डा.वनिता गुप्ता ने एड्सकॉन के बारे में जानकारी दी।
डा. गुगनेजा ने बताया कि देश भर से 300 से अधिक डेलीगेट्स एचआईवी एड्स पर किए गए विभिन्न शोध पर कांफ्रेंस में मंथन करेंगे। कांफ्रेंस में 200 से अधिक शोधपत्र भी पेश किए जाएंगे। डा.गुगनेजा ने कहा कि कांफ्रेंस में मीडिया में एचआईवी एड्स के बारे में छपने वाली रिपोर्ट्स को लेकर भी चर्चा होगी।
पीजीआई में 4 हजार से अधिक एचआईवी मरीजों का चल रहा इलाज
जानकारी अनुसार एचआईवी एड्स पीड़ित लोगों के इलाज को बेहतर बनाने के लिए भारत सरकार की ओर से हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। डॉ.गुगनेजा के अनुसार पीजीआई में 4232 एचआईवी पीड़ितों का इलाज चल रहा है। एचआईवी से ग्रस्त मरीजों में चंडीगढ़ के 498(11.76 फीसदी) भी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि 2012 के बाद से एचआईवी मरीजों की संख्या काफी स्थिर हुई है। डा.गुगनेजा के अनुसार रक्तदान में एचआईवी की पाजिटिविटी का हिस्सा 0.05 से 0.08 फीसदी है,जोकि काफी कम हो रहा है।