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ऐतिहासिक फैसलाः अब रात 10 बजे से पहले होगी दुल्हन की विदाई और ससुराल में आगमन

Mon, 08 Oct 2018 12:45 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चरखी दादरीहरियाणा)
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खाप पंचायत में कई ऐतिहासिक फैसले लेते हुए ऐलान किया गया कि अब रात को 10 बजे से पहले दुल्हन की विदाई होगी और ससुराल में स्वागत भी इसी टाइम किया जाएगा। चरखी दादरी के गांव खेड़ी बूरा स्थित सांगू धाम पर सांगवान खाप-40 की पंचायत आयोजित की गई। इसमें सामाजिक परंपराओं को बदलने पर मंथन किया गया।
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पंचायत में सर्वसम्मति से कुछ निर्णयों को बदलने पर सहमति जताई गई। इसमें रात दस बजे से पहले बेटी की विदाई करने और दस बजे से पहले दुल्हन को घर लाने के निर्णय भी शामिल है। इसके अलावा भविष्य में खाप के अधीन आने वाले 40 गांवों में किसी बुजुर्ग या नौजवान की मृत्यु होती है तो उसकी अस्थियां (फूल) गंगा में प्रवाहित करने की बजाय गांव में ही परिजन गड्ढा खोदकर दफना देंगे और उसके ऊपर पौधा भी लगाएंगे।

इस फैसले की अगर कोई भी ग्रामीण अवहेलना करता है तो उसके खिलाफ सामाजिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पंचायत में 11 नवंबर को आयोजित होने वाली उत्तर भारत की सर्वखापीय और जातीय महापंचायत पर भी मंथन किया गया। यह महापंचायत गांव चरखी स्थित एससीआर स्कूल में आयोजित होगी और इसके लिए उत्तरी भारत की सभी खापों को निमंत्रण भेजे जा रहे हैं।
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सुबह करीब साढ़े 11 बजे सांगू धाम पर प्रधान सोमबीर सांगवान की अध्यक्षता में पंचायत शुरू हुई। इसमें मंच संचालन सचिव नरसिंह डीपीई ने किया। पंचायत में खाप के सभी कन्नी प्रधानों और मौजिज लोगों ने भाग लिया।

अस्थियां प्रवाहित करने का पुराना तरीका बदला जाएगा

ashes - फोटो : ashes
खाप प्रधान सोमबीर सांगवान ने कहा कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ खापों को मोर्चा खोलने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी सांगवान खाप कई कुरीतियों पर सर्वसम्मति से रोक लगा चुकी है और भविष्य में भी यह प्रयास जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि खाप के अधीन आने वाले सभी गांवों के ग्रामीण भविष्य में दहेज का दिखावा कतई नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा कि अस्थियां प्रभावित करने के पुराने ढर्रे को अब बदलने की जरूरत है। खाप सचिव नरसिंह डीपीई ने कहा कि गंगा में जब अस्थियां प्रभावित करने जाते हैं तो वहां पंडों के पास भी जाना पड़ता है और मृतक के परिजनों से वो मनचाही रकम वसूलते हैं। इतना ही नहीं जब अस्थियां प्रभावित की जाती है तो उस समय वहां घाट पर मौजूद लोग छीना-झपटी पर उतारू हो जाते हैं। इसलिए भविष्य में अस्थियां प्रभावित करने की बजाय इन्हें गांव में ही गड्ढा खोदकर दफन कर दें और इसके ऊपर पौधरोपण कर नियमित देखभाल करें।

इससे सामाजिक कुरीति से निजात मिलेगी तो वहीं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। करीब दो घंटे चली पंचायत में सामाजिक कुरीतियों से संबंधी करीब 10 फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। इन फैसलों को लागू कराने के लिए पंचायत में कन्नी प्रधानों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। ये कन्नी प्रधान अपने अधीन आने वाले गांवों में जाकर पंचायत आयोजित करेंगे और लोगों को इनकी जानकारी देंगे। अगर इसके बावजूद कोई खाप के फैसले की पालना नहीं करता तो उसे खिलाफ सामाजिक कार्रवाई खाप अमल में लाएगी।  
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सर्व खापीय और जातीय महापंचायत में महिलाओं की होगी भागीदारी

khap panchayat
खाप प्रधान सोमबीर सांगवान और सचिव नरसिंह डीपीई ने बताया कि 11 नवंबर को जो उत्तरी भारत की जो सर्वखापीय और जातीय महापंचायत बुलाई गई है उसमें कई सामाजिक मुद्दों पर चर्चा कर सर्वसम्मति से फैसले लिए जाएंगे। इनमें बढ़ती गैंगरेप और दुष्कर्म की घटनाएं अहम होंगी। सचिव नरसिंह ने बताया कि महापंचायत में महिलाओं की भागीदारी अहम होगी।

सांगवान खाप पंचायत को पहली दफा महिला ने किया संबोधित
अमूमन देखा जाता है कि महिलाएं सांगवान खाप की पंचायत में भाग नहीं लेती। रविवार को सांगू धाम पर आयोजित पंचायत को रेवाड़ी से आई समाज सेविका सुमन ने भी संबोधित किया। सुमन ने कहा कि सर्वखापीय और जातीय पंचायत में महिला की भागीदारी अहम होगी। सचिव नरसिंह ने बताया कि यह पहला मौका था जब सांगू धाम पर आयोजित पंचायत में किसी महिला ने संबोधित किया।     

ये फैसले  लिए गए पंचायत में     
- रात दस बजे से पहले होगी बेटी की विदाई और दुल्हन को लेकर लौटेगी बारात।      
- किसी भी बारात में नहीं जाएंगे 51 से ज्यादा बाराती और दिन की ही होगी शादी।      
- रिश्तेदार में मातमपूर्सी पर पड़ोस के लोगों की बजाय घर के ही केवल 11 लोग जाएं।      
- रस्म पगड़ी पर दस रुपये और कन्यादान के रूप में नहीं दी जाएगी 10 रुपये से अधिक की राशि।      
- गोद भराई पर पांच व्यक्ति से ज्यादा नहीं जाएंगे।      
- दाह-संस्कार में शरीक होने के लिए नहीं बुलाया जाएगा रिश्तेदारों को। 
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