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लाहौर में हिंदुओं का श्मशानघाट मिलने से पहले ही गायब?

Wed, 24 Jun 2015 09:17 PM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, अमृतसर
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लंबी जद्दोजहद के बाद लाहौर के हिंदुओं को अपने मृतकों के संस्कार के लिए नसीब हुआ शमशानघाट उन्हें मिलने से पहले ही गायब हो गया है।
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इतिहास शोधकर्ता सुरेंद्र कोछड़ ने बताया कि इससे पहले भी पाकिस्तान इवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड द्वारा सन् 1976, मई 1999, अगस्त 2010 तथा सन् 2011 में लाहौर के मृतक हिन्दुओं के संस्कार के लिए शमशानघट बनाने हेतु भूमि अलाट की जा चुकी है, जिन पर अभी भी अलग-अलग मुस्लिम समुदाय के लोगों का कब्जा कायम है।

कोछड़ ने बताया कि पाकिस्तानी हिंदूओं द्वारा पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट में पटीशन दायर करने पर कोर्ट ने अगस्त 2012 में राज्य सरकार को शमशान घाट के लिए भूमि अलाट करने का आदेश दिया था।
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कोई कार्रवाई न होने पर कोर्ट ने पुन: 25 दिसम्बर 2013 तक शमशानघाट के लिए 14,200 स्कवेयर फुट भूमि अलाट करने का आदेश जारी किया। जिस के बाद राज्य सरकार द्वारा मई 2014 में शमशानभूमि अलाट करके शमशानघाट के लिए इमारत का निर्माण शुरू करवाया गया।

इस का निर्माण मुकम्मल कर पिछले सप्ताह तक यह स्मारक हिंदुओं के सुपुर्द किया जाना था, परन्तु इसके मात्र एक दिन पहले स्थानीय मुसलमानों ने यह कहकर दंगा-फसाद शुरू कर दिया है कि शमशानघाट की भूमि पर मुस्लिम संत हवेली शाह की मज़ार स्थापित है, इस लिए किसी काफिर को वहां मृतक देह नहीं जलाने दी जाएगी।
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उधर पाकिस्तानी हिंदुओं का दावा है कि शमशानघाट की भूमि पर मुस्लिम संत नहीं बल्कि हिंदू संत बाबा हवेली राम की समाधि कायम है और आस-पास की सारी भूमि इसी हिंदू समाधि के नाम पर है।
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