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नगर निगम चंडीगढ़ को रिपोर्ट सौंप दी है, बदलनी ही होंगी गारबेज प्लांट की मशीनें: रुड़की आईआईटी

Wed, 26 Aug 2020 10:38 AM IST
खुशबू गोयल नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़

सार

  • पुरानी मशीनों से नहीं किया जा सकता शहर के कचरे का निस्तारण
  • कचरा निस्तारण की क्षमता बढ़ाने को कचरा भी करना होगा अलग-अलग
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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रुड़की आईआईटी ने जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट की रिपोर्ट नगर निगम को दे दी है। इसमें कहा है कि प्लांट की मशीनों को हर हाल में बदलना होगा। हालांकि कचरा निस्तारण की कुछ क्षमता बढ़ाने के लिए निगम को गीला-सूखा कचरा अलग-अलग ही लेना होगा। 2008 में मशीनों को म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट 2000 के दिशा निर्देशों के अनुसार लगाया गया था।
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उसके बाद अब म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट 2016 के दिशा निर्देश लागू हो चुके हैं। निगम को उसी अनुसार कचरे का निस्तारण कराना होगा। मशीनें काफी पुरानी हैं। इन्हें ठीक करवाकर कोई फायदा नहीं। हालांकि गीला-सूखा कचरा अलग-अलग निस्तारित कर 20 से 40 प्रतिशत तक कचरा निस्तारण की क्षमता बढ़ाई जा सकती है। इससे 200 टन प्रतिदिन कचरा निस्तारित किया जा सकता है, लेकिन सबसे बेहतर तरीका यही है कि निगम नया प्लांट लगवाए।  

500 टन प्रतिदिन कचरा निस्तारित करने वाली मशीनें लगानी होंगी  
रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल मशीन 60 से 65 टन प्रतिदिन ही कचरा प्रोसेस कर सकती है। फिलहाल मशीन 30 टन सूखा-गीला अलग-अलग कचरा व 19 टन मिश्रित कचरा निस्तारित कर रही है। कुल मिलाकर मशीनरी अपनी क्षमता का 10 प्रतिशत ही काम कर रही है।
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मशीनरी से 13.2 (26 प्रतिशत) टन प्रतिदिन ऑर्गेनिक्स, 13.2 (26 प्रतिशत) टन प्रतिदिन नमी, 5.01 (10 प्रतिशत) टन प्रतिदिन निष्क्रिय पदार्थ बनाता है। अंत में 41 प्रतिशत आरडीएफ बनाता है। बेहतर पानी की निकासी व रखरखाव न होने से प्लांट में काफी गंध है इसलिए प्लांट में 500 टन प्रतिदिन कचरे के निस्तारण वाली मशीनें लगानी होंगी।

प्रेशर जेट से करनी होगी सफाई, केवल ताजा कचरा हो निस्तारित

रिपोर्ट के अनुसार हर सप्ताह मशीनों को प्रेशर जेट से साफ कराना होगा और महीने में एक बार ब्लीचिंग पाउडर से सफाई करनी होगी। 6 से 8 घंटे की सफाई के लिए 8 मजदूर व एक सुपरवाइजर लगेगा। एक हजार रुपये एक मजदूर के हिसाब से 8 हजार इसका खर्च आएगा। मशीनों से केवल ताजा कचरा ही निस्तारित हो ताकि उसकी क्षमता को बरकरार रखा जा सके।  

एनआईटीटीटीआर ने भी मशीनें बदलने का दिया था सुझाव  
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर (एनआईटीटीटीआर) ने भी जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट की सभी मशीनों को बदलने के लिए कहा था। एनआईटीटीटीआर ने रिपोर्ट में बताया था कि अभी जो मशीनें लगी हैं, वह काफी पुरानी टेक्नोलॉजी की हैं। इनसे केवल 15 से 20 प्रतिशत कार्य ही लिया जा सकता है। जो कि अभी चल रहा है। शहर में प्रतिदिन 500 टन कचरा निकलता है। ऐसे में पूरा कचरा प्रोसेस करने की क्षमता इन मशीनों में नहीं है। इसके लिए नई टेक्नोलॉजी वाली मशीनें ही लगानी होंगी।
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हर दो से तीन घंटे में रोकनी पड़ती है मशीन

एनआईटीटीटीआर ने बताया था कि मशीनों की स्थिति वास्तव में काफी खस्ता हाल है। हर दो से तीन घंटे में मशीन गर्म हो जाती है। उसके बाद मशीन को रोकना पड़ता है। न रोकने के स्थिति में कई बार पट्टे में आग भी लग जाती है। पहले भी प्लांट में कचरे में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में मशीन पर बहुत ज्यादा बोझ नहीं डाला जा सकता है।

12 साल पुरानी हैं मशीनें, अब मरम्मत की भी स्थिति नहीं
एनआईटीटीटीआर की रिपोर्ट में बताया गया था कि मशीनें 12 साल पुरानी टेक्नोलॉजी पर चल रही हैं। इस टेक्नोलॉजी की मशीनों को रिपेयर कराया जाएगा तब भी शत प्रतिशत कचरा प्रोसेस नहीं कराया जा सकता है, इसलिए मशीनों की मरम्मत पर खर्च करना ठीक नहीं। पुरानी मशीन होने के कारण बिजली की खपत भी ज्यादा है और कचरा प्रोसेस भी ठीक से नहीं हो रहा है।
 
आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट मिली है। 17 पेजों की रिपोर्ट में हर मशीन के बारे में विस्तार से बताया गया है। रिपोर्ट में मशीनों को बदलने का ही सुझाव दिया गया है। अब अधिकारियों व सदन से चर्चा कर आगे की प्रक्रिया पर काम करेंगे।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम
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