यूपीएससी में 26वीं रैंक हासिल करने के बाद हिमांशु नागपाल ने बताया कि उन्हें पढ़-लिखकर कुछ बनने की प्रेरणा अपने माता-पिता से मिली और उनके परिजनों ने हर कदम पर उनका पूरा मार्गदर्शन किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के दौरान ही आईएएस बनकर देश की सेवा करने का लक्ष्य बनाया था और कड़ी मेहनत व परिजनों के मार्गदर्शन के बाद उन्होंने इस मुकाम को हासिल कर दिखाया है।
इसके बाद वो यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी में जुट गए और दिल्ली के एक सेंटर से कोचिंग हासिल कर कड़ी मेहनत के बाद देशभर में 26वीं रैंक हासिल की है।
त्योहारों में भी दिल्ली से नहीं आता घर, परीक्षा की तैयारी में जुटा रहता : दादी
हिमांशु नागपाल की दादी शीला देवी ने बताया कि स्कूली शिक्षा के दौरान ही हिमांशु अपनी पढ़ाई के प्रति गंभीर था और भोजन करते ही वो मकान की तीसरी मंजिल पर बैठकर घंटों तक पढ़ाई करता था।
उन्होंने बताया कि दिल्ली में पढ़ाई के दौरान उसने हांसी अपने घर के तमाम कार्यक्रमों में आना ही कम कर दिया था। दिवाली व होली के त्योहार पर भी घर पर न आकर उसने यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी करना जारी रखा।
मोहाली निवासी मनिंदर सिंह ने यूपीएससी में 195वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने तीसरी बार में यह रैंक हासिल की है। सिंचाई विभाग में एसडीओ जसपाल सिंह के बेटे मनिंदर कहते हैं कि परीक्षा के लिए भूगोल विषय को चुना था। उसके बाद सात से आठ घंटे नियमित पढ़ाई की। आईआईटी जोधपुर से बीटेक किया था। उसी के साथ से इसकी तैयारी में लगे थे। घर पर सेल्फ स्टडी की। अन्य विद्यार्थी भी सेल्फ स्टडी से चमक सकते हैं। कड़ी मेहनत कभी फेल नहीं होती है। अपनी मेहनत पर विश्वास रखना भी जरूरी है।