सुनील ने बताया कि उनकी शादी तीन साल पहले चरखी दादरी की रहने वाली स्वाति से हुई थी। दोनों ने शादी के बाद से ही साथ में सिविल सेवा की तैयारी करनी शुरू कर दी थी। दोनों ने तैयारी के दौरान एक-दूसरे का सहयोग किया। किसी भी समस्या के समाधान के लिए आपस में ही डिस्कस कर हल निकाल लेते थे। जिससे तैयारी के दौरान काफी मदद मिलती थी।
कानपुर आईआईटी से किया बीटेक
रोहतक के अंबेडकर चौक स्थित मॉडल स्कूल से प्रारंभिक पढ़ाई की। इसके बाद कानपुर आईआईटी से मेकैनिकल इंजीनियरिंग की। इंजीनियरिंग करने के बाद यूके की एक फाइनेंस कंपनी में चार साल काम किया।
यूके में चार साल नौकरी करने के बाद जब रोहतक वापस आया तो बचपन के सपने को साकार करने के लिए सिविल सेवा की तैयारी करनी शुरू की। आज परीक्षा में 192वीं रैंक हासिल करने के बाद बचपन का सपने साकार हो गया। सुनील ने बताया कि यूके गए तब सभी दोस्तों ने सोचा था, सरकारी नौकरी नहीं करेंगे, लेकिन वहां जब एक दोस्त का यूपीएससी में सिलेक्शन हुआ तो लगा कि यह मुझे भी करना होगा और स्वदेश वापस आकर तैयारियों में जुट गया।
मां होती तो खुशियां और बढ़ जातीं
सुनील ने बताया कि उनके पिता धर्मवीर श्योराण खेरड़ी गांव से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से टीचर रिटायर हुए हैं। मां भी टीचर थीं। दो साल पहले उनसे हमारा साथ छूट गया। अगर वह आज होतीं तो खुशियां और बढ़ जातीं। इतना कहते ही उनकी आंखें भर आईं।