दुष्कर्म के बाद मां बनने वालीं महिलाओं के हक में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़ित सम्मानपूर्वक अपने बच्चे को बड़ा कर सके और पिता की पहचान न उजागर करना चाहे तो उस पर कोई दबाव न बनाया जाए।
हाईकोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म पीड़िता को इस सदमे से उबारने और गर्भ को लेकर निर्णय लेने के लिए उनकी नियमित काउंसलिंग की व्यवस्था की जानी चाहिए। यदि गर्भ गिराने का निर्णय लिया जाए तो इसका पूरा खर्च राज्य सरकार को उठाना चाहिए। गर्भ गिराना कानूनी रूप से संभव न हो और पीड़िता बच्चे को न रखना चाहे तो सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी से संपर्क कर अडॉप्शन से जुड़े दस्तावेज जल्द से जल्द तैयार करवाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िताओं के ममता से जुड़े पक्ष को ध्यान में रखते हुए अपने आदेश में गर्भ को अपनाने वाली पीड़िताओं के लिए सम्मानजनक जीवन जीने की व्यवस्था करने को लेकर निर्णय लेने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि आर्थिक सहायता के साथ ही बच्चे की पोषक जरूरतों व सम्मानजनक विकास सुनिश्चित करने के लिए सरकार को हर संभव सहायता करनी चाहिए। सभी अधिकारियों को निर्देश जारी किए जाएं कि शिक्षण संस्थान बच्चों के पिता के नाम का आग्रह न करें।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में लुधियाना का दुष्कर्म से जुड़ा मामला 2007 से विचाराधीन था। उस मामले में कोर्ट का सहयोग करने क लिए अदालत ने एमिकस क्यूरी की नियुक्ति की थी। उनके सौंपे गए सुझावों पर हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ की कोई आपत्ति न होने के चलते अब हाईकोर्ट ने इन्हें लागू करने का तीनों को आदेश दिया है।