हरियाणा कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या कुल विधायकों की संख्या से 15 प्रतिशत से अधिक होने के मामले में हाईकोर्ट ने बुधवार को अपना रुख स्पष्ट कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई पर यदि बहस के लिए समय मांगा गया तो मंत्रियों व दर्जा प्राप्त मंत्रियों के वेतन भत्तों पर रोक लगाई जा सकती है। जनहित याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा में मंत्रियों की संख्या पर प्रश्न चिह्न लगाया गया है।
याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुसार किसी भी प्रदेश में मंत्रियों की संख्या विधायकों की कुल संख्या का 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती है। हरियाणा में 90 विधायक हैं और ऐेसे में 15 प्रतिशत 13.5 बनता है और इससे अधिक मंत्री नहीं हो सकते, इसलिए अधिकतम मंत्री 13 हो सकते हैं। हरियाणा सरकार का पक्ष इस मामले में अधिकतम मंत्रियों की संख्या 14 का है। इसी को लेकर पूरा विवाद है। इसके साथ ही दर्जा प्राप्त मंत्रियों आदि को भी इस याचिका में याचिकाकर्ता ने शामिल किया है।
याचिका पर सुनवाई के दौरान बुधवार को ज्ञान चंद गुप्ता की तरफ से जवाब दायर कर कहा गया कि वह कैबिनेट मंत्री नही हैं, इसलिए याचिका में उनको प्रतिवादी बनाना उचित नहीं है। वह कैबिनेट की बैठक में नहीं भाग लेते, इसलिए इस याचिका को खारिज किया जाए। याचिकाकर्ता ने अमेरिका कोर्ट की उस जजमेट का हवाला दिया, जिसमें कोर्ट ने जनहित के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसके तहत राष्ट्रपति ने बाहर से आने वाले लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी।
इसी तरह पाक सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पाक के प्रधानमंत्री को अयोग्य करार दिया था। इसलिए हाईकोर्ट भी इस मामले में सख्त कदम उठाते हुए जनहित के लिए अधिक संख्या में नियुक्त मंत्रियों को हटाने का आदेश दे। केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्य पाल जैन ने हाईकोर्ट को बताया कि इस विषय पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से उन्हें भेजे गए पत्र में गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि हरियाणा में 14 मंत्रियों की नियुक्ति की जा सकती है।
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद स्पष्ट कहा कि अगर अगली सुनवाई पर बहस के लिए समय देने की मांग की गई तो कोर्ट प्रतिवादी मंत्री व दर्जा प्राप्त प्रतिवादी के वेतन भत्ते व सुविधा पर रोक का आदेश जारी कर सकता है।