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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा- ‘चाहे सख्ती करो या चालान, पराली जलाने पर लगाओ लगाम’

Sat, 19 Oct 2019 01:06 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा और पंजाब सरकार को दो टूक शब्दों में कहा है कि चाहे सख्ती करो या चालान करो, लेकिन पराली जलाने पर रोक लगनी चाहिए। हालांकि पूर्व में पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ चालान व जुर्माने पर रोक के आदेश को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। साथ ही केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।

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चीफ जस्टिस रवि शंकर झा पर आधारित खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पराली जलाने को लेकर पहले जिनके चालान किए गए हैं उनके जुर्माने पर फिलहाल रोक जारी रहेगी। इससे पहले जस्टिस आरएन रैना इस मामले की सुनवाई कर रहे थे और उन्होंने कहा था कि बढ़ता वायु प्रदूषण एक घातक समस्या है ऐसे में पराली से निपटने के लिए एक दीर्घकालिक योजना जरूरी है।

उन्होंने पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों के कृषि सचिवों से इस विषय में उनके विभिन्न विश्वविद्यालयों से साझे तौर पर काम कर ठोस हल निकाले जाने के आदेश दिए थे। साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव से इस मामले में जवान तलब किया था कि उनके पास इस समस्या से निपटने के लिए क्या योजना है।

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जब मामला चीफ जस्टिस पर आधारित खंडपीठ के समक्ष पहुंचा तो केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है, यह पर्यावरण मंत्रालय का मामला बनता है। इस पर हाईकोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। 

साथ ही जैन ने बताया कि केंद्र सरकार ने विभिन्न स्कीमों के तहत पराली के निपटारे के लिए उत्तर भारत में करीब 500 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। पराली निपटारे की मशीनरी पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है और सामूहिक खरीद की स्थिति में 80 प्रतिशत तक। 

हाईकोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए हैं। इस दौरान पंजाब सरकार ने कहा कि मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है ऐसे में हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने दलील खारिज करते हुए जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
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