जब मामला चीफ जस्टिस पर आधारित खंडपीठ के समक्ष पहुंचा तो केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है, यह पर्यावरण मंत्रालय का मामला बनता है। इस पर हाईकोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
साथ ही जैन ने बताया कि केंद्र सरकार ने विभिन्न स्कीमों के तहत पराली के निपटारे के लिए उत्तर भारत में करीब 500 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। पराली निपटारे की मशीनरी पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है और सामूहिक खरीद की स्थिति में 80 प्रतिशत तक।
हाईकोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए हैं। इस दौरान पंजाब सरकार ने कहा कि मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है ऐसे में हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने दलील खारिज करते हुए जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।