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यूटी के मास्टर प्लान की देरी पर हाईकोर्ट सख्त

Wed, 11 Mar 2015 10:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ और इसके आसपास पंजाब व हरियाणा क्षेत्र का क्षेत्रीय प्लान बनाने में देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार व यूटी प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने आनाकानी से बाज आते हुए तीन हफ्ते में मास्टर प्लान बनाने का निर्देश दिया है।
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यूटी ने हाईकोर्ट को बताया कि मास्टर प्लान केंद्र के पास भेजा गया था, वहां से कुछ आपत्तियां लगी हैं। इन्हें दूर करने के लिए कुछ और समय लगेगा। यही बात पिछली सुनवाई पर भी कही गई थी। आखिरकार यूटी और केंद्र को कड़ी फटकार लगाते हुए जस्टिस एसकेमित्तल व जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू की डिवीजन बेंच ने तीन हफ्ते में मास्टर प्लान बनाने को कहा है।

आपत्तियों से पहले केंद्र के स्टैंडिंग काउंसिल ओंकार सिंह बटालवी ने हाईकोर्ट को बताया था कि केंद्रीय शहरी विकास सचिव की अध्यक्षता में 19 सितंबर को मीटिंग हुई थी। मिनट्स ऑफ मीटिंग भी पेश किए। बताया था कि मीटिंग में चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा में चंडीगढ़ क्षेत्रीय प्लॉन को लेकर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। यह सामने आया कि अभी पंजाब और हरियाणा ने प्लान पर मतभेदों के बारे में अपने विचार रखने हैं।
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बेंच को बताया गया था कि यूटी प्रशासक के सलाहकार ने मीटिंग में कहा कि यूटी मास्टर प्लान-2031 गृह मंत्रालय को भेजा जा चुका है। इसकी एक प्रति पीएमओ कार्यालय भी भेजी गई है। सलाहकार ने यह भी मीटिंग में कहा था कि मास्टर प्लान में नया गांव, कांसल और करौरां में प्रस्तावित शहरीकरण पंजाब सरकार ने अधिसूचित किया है।

इसके अलावा बताया गया था कि 1984 में चंडीगढ़ प्लान राज्य सरकारों और यूटी ने साझा तौर पर बनाया था और इसमें चंडीगढ़ और कैपिटल कांप्लेक्स के पास शिवालिक के विकास पर संवेदनशीलता दिखाई थी। उत्तरी चंडीगढ़ में शिवालिक की पहाड़ियों तक के क्षेत्र को नो कंस्ट्रक्शन जोन का प्रस्ताव था।

यह भी कहा था कि शिवालिक की पहाड़ियों में विकास हो चुका है, लेकिन यह जरूरी है कि पहाड़ियों का दृश्य गायब न हो और न ही पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़े। मीटिंग में हरियाणा सरकार ने कहा कि पेरी फेरी में पड़ते क्षेत्र को अधिसूचित किया जा चुका है। इसका 33 प्रतिशत हिस्सा फॉरेस्ट में पड़ता है और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। हरियाणा के हिस्से के पेरीफेरी क्षेत्र के लिए मास्टर प्लान तैयार है।

पंजाब सरकार ने मीटिंग में कहा कि गमाडा के लिए क्षेत्रीय प्लान पहले से तैयार किया जा चुका है। पंजाब के हिस्से में योजनाबद्ध तरीके से विकास किया जा रहा है।

हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि केंद्रीय शहरी विकास सचिव ने पंजाब व हरियाणा से पूछा है कि क्या चंडीगढ़ पेरीफेरी में विकास में नियमों की अवहेलना न हो रही हो। सचिव ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को क्षेत्रीय प्लान के मुद्दे पर मान्य शर्तों के साथ तय समय में सहमति बनाने को भी कहा है।

हालांकि स्टैंडिंग काउंसिल ने इससे पहले की एक मीटिंग का हवाला भी दिया। इसमें केंद्रीय सचिव ने कहा कि को-ऑर्डिनेशन कमेटी केवल सलाह दे सकती है, राज्य सरकारों को बाध्य नहीं कर सकती। यदि कोई फैसला कमेटी लेती है तो इसे मानना या न मानना राज्यों पर निर्भर करता है।
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