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प्राइवेट स्कूलों में दाखिले के फर्जीवाड़े में फंसा हाईकोर्ट स्टाफ

Sat, 16 Apr 2016 01:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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एडमिशन घोटाला - फोटो : demo pics
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चंडीगढ़ के प्राइवेट स्कूलों में एकोनॉमिक वीकर सेक्शन (ईडब्ल्यूएस) कोटे के तहत दाखिले में फर्जीवाड़े के मामले सामने आने लगे हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने फर्जी प्रमाण पत्रों से दाखिला कराने के मामले में पहली एफआईआर दर्ज कर ली है।
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सेक्टर-34 थाने में एसडीएम (सेंट्रल) प्रिंस धवन की शिकायत पर कैंबवाला निवासी संतोषी लाल के खिलाफ धोखाधड़ी (420 धारा) का केस दर्ज किया गया है। संतोषी ने अपने बच्चे को फर्जी प्रमाण पत्र पर सेक्टर-33 स्थित टेंडर हार्ट स्कूल में दाखिला कराने की कोशिश की थी। संतोषी केस दर्ज होने के बाद से ही फरार है।

पुलिस उसको पकड़ने के लिए चंडीगढ़ और कैंबवाला में देर रात तक छापेमारी करती रही। आरोपी पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में कर्मचारी है, और अभी निलंबित चल रहा है। अमर उजाला ने ईडब्ल्यूएस कोटे की 25 फीसदी सीटों पर फर्जी प्रमाण पत्रों से दाखिले के मामले में 15 अप्रैल के अंक में निजी स्कूलों में ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत हुए दाखिले में गड़बड़झाले की शिकायत...शीर्षक से खबर भी प्रकाशित की थी।
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शहर के नामी प्राइवेट स्कूलों में गरीब बनकर बच्चों को पढ़ाने के लिए काफी अभिभावक काफी समय से आय और रेजिडेंस के फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर जमा करा रहे हैं। इस मामले में प्राइवेट स्कूलों के पास काफी शिकायतें भी आईं, लेकिन कई सालों से स्कूल प्रबंधन इस मामले में चुप्पी साधे बैठे रहे।

क्या है फर्जी प्रमाण पत्र का मामला: कैंबवाला निवासी संतोषी लाल बच्चे का दाखिला सेक्टर-33 स्थित टेंडर हार्ट में ईडब्ल्यूएस कोटे से करवाना चाहता था। इसके लिए उसने स्कूल में एफिडेविट दिया कि उसकी मासिक आय 10 हजार रुपये है। उसने इस संबंध में एसडीएम से झूठा प्रमाण पत्र भी हासिल कर लिया। संतोषी ने अपनी सालाना आय 1 लाख 13 हजार रुपये बताई थी। इस मामले में स्कूल प्रबंधन को शक हुआ और संबंधित एरिया के एसडीएम को लिखित शिकायत दी।

मामला चंडीगढ़ के डीसी अजीत बालाजी जोशी तक पहुंचा। उन्होंने ही एसडीएम को मामले की जांच के आदेश दिए।  मामले की जांच में पूरा मामला फर्जी निकला। अधिकारियों ने संतोषी की वर्ष 2014-15 की इनकम टैक्स रिटर्न की जांच की तो भेद खुल गया। रिटर्न में संतोषी की आय 1 लाख 60 हजार और पत्नी की 1 लाख 50 हजार बताई गई थी। पूरे मामले की जांच के बाद एसडीएम(सेंट्रल) प्रिंस धवन के आदेशों पर सेक्टर-34 पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कर ली गई।
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अब खुलेंगे दाखिले में फर्जीवाड़े के राज 

घोटाला - फोटो : demo pic
प्राइवेट स्कूलों में ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में फर्जी तरीके से दाखिला कराने का धंधा काफी समय से चल रहा है। एक एफआईआर दर्ज होने के बाद अब झूठे प्रमाण पत्र से प्राइवेट स्कूलों में दाखिला कराने वाले गैंग का भंडाफोड़ होने की उम्मीद है।

सूत्रों के अनुसार शहर के कई हिस्सों में गैंग से जुड़े सदस्य पैसे लेकर एसडीएम स्तर के फर्जी प्रमाण पत्र लोगों को उपलब्ध करा रहे हैं।  शहर के सभी प्राइवेट स्कूलों में अभी तक हुए ईडब्ल्यूएस कोटे के लिए प्राप्त सभी प्रमाण पत्रों की जांच कराई जाएगी।
 
हर साल ईडब्ल्यूएस कोटे में 2000 सीटों पर दाखिले 
शहर के करीब 80 प्राइवेट स्कूलों में हर साल ईडब्ल्यूएस कोटे में 2000 सीटें रिजर्व है। राइट टू एजुकेशन 2009 के बाद से प्राइवेट स्कूलों में 25 फीसदी सीटों पर ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत दाखिला देना अनिवार्य है। शहर के नामी प्राइवेट स्कूलों में एंट्री लेवल (नर्सरी - केजी) में दाखिला फीस ही 50 हजार से 1.50 लाख रुपये है।

ईडब्ल्यूएस कोटे की सीटों पर जनरल पूल के मुकाबले कम आवेदन होते हैं। ईडब्ल्यूएस कोटे के बच्चों को आठवीं तक  किताबें, ड्रेस और फीस निशुल्क दी जाती है। प्राइवेट स्कूलों को ईडब्ल्यूएस कोटे में दाखिल बच्चों की फीस का भुगतान शिक्षा विभाग करता है। ऐसे में अब शिक्षा विभाग पूरे फर्जीवाड़े की जांच करेगा।

नवदीप सिंह बराड़, एएसपी साउथ चंडीगढ़ ने बताया कि  ईडब्ल्यूएस कोटे में बच्चे के दाखिले के लिए फर्जी दस्तावेज देने के मामले में कैंबवाला निवासी संतोषी लाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। उसको गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पूछताछ में फर्जी सटिर्फिकेट बनाने के और मामले भी सामने आ सकते हैं।
 
रूबिंदरजीत सिंह बराड़, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन चंडीगढ़ ने बताया कि ईडब्ल्यूएस कोटे का लाभ सिर्फ गरीब बच्चों को ही मिलना चाहिए। इस मामले में प्राइवेट स्कूलों को प्रमाण पत्रों की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। शिक्षा विभाग इस मामले में अपने स्तर पर भी जांच करेगा। सभी प्राइवेट स्कूलों को अभी तक हुए ईडब्ल्यूएस दाखिलों के प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश दिए जाएंगे।
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