चंडीगढ़ में ग्रीन बेल्ट पर मिल्क बूथ बनाने का रास्ता हाईकोर्ट की मंजूरी के बाद साफ हो गया है। चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा इसके लिए बनाई गई पॉलिसी पर मोहर लगाते हुए हाईकोर्ट ने इसको लेकर लंबित याचिका का निपटारा कर दिया है।
प्रशासन द्वारा कोर्ट को सूचित किया गया था कि शहर के विभिन्न सेक्टरों में 31 वेरका और 64 वीटा के मिल्क बूथ अलॉट किए जाएंगे। इनमे वह बूथ भी शामिल होंगे जो पहले से ही चल रहे हैं। प्रशासन ने बताया कि बूथ सीधे अलॉटियों को नहीं दिए जाएंगे बल्कि इन्हें किसे अलॉट करना है यह फैसला दोनो कंपनियां लेंगी। इन 64 मिल्क बूथों के अलॉटमेंट के बारे में चंडीगढ़ प्रशासन ने हाई कोर्ट को जानकारी दी है।
हाईकोर्ट को बताया गया कि इन बूथ का मासिक किराया 6520 रुपये तय कर दिया गया है। यह मिल्क बूथ कहा होंगे इसके लिए चीफ इंजिनियर ने जगह तय कर दी है। यह भी तय कर दिया गया है कि, ये बूथ 10 बाय 10 फुट की जगह में प्री-फेब्रिकेटेड स्ट्रक्चर में चलाए जा सकते हैं। इन बूथ के लिए पक्के ढांचे का निर्माण नहीं किया सकता है। यह जानकारी चंडीगढ़ प्रशासन ने वीटा का मिल्क बूथ चलने वाली अनीता चौधरी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई एक दौरान दी है।
याचिकाकर्ता ने वर्ष 2011 में हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि वह वर्ष 2007 से वीटा का मिल्क बूथ चला रही थी। चार वर्षों तक मिल्क बूथ चलाये जाने के बाद वर्ष 2011 में चंडीगढ़ प्रशासन ने उसे नोटिस जारी कर अपना मिल्क बूथ यहाँ से यह कहते हुए हटाए जाने के आदेश दे दिए थे कि यह मिल्क बूथ ग्रीन बेल्ट में आ रहा है। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसकी ही तरह शहर के अन्य मिल्क बूथ भी ऐसी ही जगहों पर चल रहे हैं।
इस मामले में हाई कोर्ट के नोटिस जारी कर मिल्क बूथ के अलॉटमेंट की नीति की जानकारी मांगी थी। प्रशासन ने हाई कोर्ट को बताया था कि उन्होंने नोटिस वापिस ले लिया है। जस्टिस राजन गुप्ता ने प्रशासन द्वारा दी गई इस जानकारी को रिकॉर्ड में लेते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।