इस पर पंजाब सरकार ने बताया कि मामले की जांच कर रहे एआईजी को निलंबित कर दिया है। पंजाब के एजी ने जांच सीबीआई और ईडी को न सौंपने का निवेदन किया। उन्होंने कहा कि एसएसओसी को 15 दिन की मोहलत दी जाए और अगर परिणाम से अदालत संतुष्ट न हो तो जांच किसी को भी सौंपी जाए, हमें आपत्ति नहीं होगी। हाईकोर्ट ने कहा कि जेल अधिकारियों के खिलाफ जांच करने में पंजाब पुलिस सक्षम नहीं है। इसके बाद हाईकोर्ट ने सीबीआई और ईडी के वकील को बुलाकर इस मामले में प्रतिवादी बना लिया और मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया।
जेल में नशा मिलने पर जेलर को करो बर्खास्त
हाईकोर्ट ने कहा कि जेल अधिकारियों की बर्खास्तगी से कम की सजा पर यह अपराध नहीं रुकने वाले। इंक्रीमेंट रोकने की सजा का कोई मतलब नहीं है। इन्हें वेतन देना बंद कर दोगे तो भी ये काम करते रहेंगे, क्योंकि हर महीने 20 करोड़ रुपये से ऊपर की कमाई है। जेल से नशे का कारोबार चल रहा है, इससे बड़ा और क्या अपराध होगा। कोर्ट ने कहा कि जेल से नशा मिले तो जेलर को बर्खास्त करो, नशा तस्करी का आरोपी बरी हो तो जांच अधिकारी को, तभी यह नेटवर्क टूटेगा।
यह था मामला
जेल में नशा तस्करी की आरोपी महिला की जमानत याचिका सुनवाई के लिए पहुंची थी। हाईकोर्ट ने इस पर याचिका का दायरा बढ़ाते हुए जेलों में नशे को लेकर एडीजीपी जेल को तलब किया था। मामले की जांच एसएसओसी कर रहा था और एक भी जेल अधिकारी का नाम जांच में सामने नहीं आया था। ऐसे में हाईकोर्ट ने एसएसओसी के प्रमुख को तलब कर लिया जो शुक्रवार को आदेश के अनुसार हाजिर हुए।