अवैध खनन पर सुनवाई के दौरान पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर अभी इसे रोकने के प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में सिंचाई तो दूर पंजाबवासी पीने के पानी के लिए तरस जाएंगे। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर पंजाब सरकार को इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
इस मामले में चंडीगढ़ निवासी गुरबीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि पंजाब में अवैध खनन जोरों पर चल रहा है। पंजाब सरकार को हर वर्ष लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसके साथ ही अवैध खनन करते हुए नियमों और मानकों को ताक पर रख दिया जाता है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है बल्कि प्रकृतिक आपदा का भय भी बढ़ जाता है।
बुधवार को याची पक्ष ने कहा कि हाल के दिनों में हुई बरसात ने आधा पंजाब पानी में डुबो दिया है। इस सबके लिए सीधे तौर पर अवैध खनन जिम्मेदार है। इसके कारण कई नदियों ने रुख बदल दिया है। इसके चलते कहीं बाढ़ तो कहीं पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। पंजाब में 70 से अधिक गांव ऐसे हैं जो पूरी तरह से सूख गए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि देश के कई राज्यों में पानी के स्रोतों के जीर्णोद्धार की कोशिश की जा रही है लेकिन पंजाब सरकार इस ओर ध्यान ही नहीं दे रही। अगर जल स्रोतों के जीर्णोद्धार व अवैध खनन को रोकने की दिशा में काम नहीं किया गया तो आने वाले समय में पंजाब सिंचाई तो दूर पीने के पानी को तरस जाएगा।
इस दौरान याची पक्ष ने कहा कि मध्य प्रदेश जिस प्रकार भू जल स्तर में सुधार हुआ है वह सभी के लिए उदाहरण है। गुजरात में भी भू जल स्तर में सुधार के लिए उल्लेखनीय काम हुए हैं। पंजाब सरकार ने कहा कि उन्हें अवैध खनन को लेकर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का मौका दिया जाए। हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि आखिर क्यों हर बार किसी कार्रवाई के लिए कोर्ट के आदेश की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। बीएसएफ, भारतीय सेना और सभी लोग चाहते हैं कि पंजाब सरकार इस पर कार्रवाई करे लेकिन सरकार केवल इंतजार कर रही है।