रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने हाईकोर्ट द्वारा 21 दिसंबर को जारी किए गए आदेश को चुनौती देते हुए दायर एलपीए में कहा कि सरकारी जमीन का इस्तेमाल केवल पार्किंग के उद्देश्य से हो रहा है। नगर निगम की पार्किंग पॉलिसी का ड्राफ्ट अभी प्रक्रिया के अधीन है और निगम ने अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू कर दिया है।
याचियों के एडवोकेट गौरव राना ने कहा कि अदालत के आदेश से रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन बुरी तरह प्रभावित हुई है क्योंकि इसमें शामिल सभी लोग सरकारी मकानों के अलॉटी हैं और घरों के आसपास की खाली जमीन का उपयोग केवल वाहन पार्किंग के लिए कर रहे हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन/नगर निगम ने अब तक ऐसा कोई सर्वे नहीं किया है, जैसा कि कोर्ट के आदेश में कहा गया था और न ही किसी को कोई व्यक्तिगत नोटिस ही जारी किया है।
उल्लेखनीय है कि सेक्टर 19 में सरकारी जमीन पर लोगों द्वारा कब्जों के कारण आ रही वाहन पार्किंग की समस्या के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 10 जनवरी तक कब्जे हटाने के आदेश दिए थे। निगम आयुक्त को इस मामले में दस जनवरी को अगली सुनवाई पर जवाब दायर करने को कहा गया था।