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नवगठित HSGMC को हाईकोर्ट का नोटिस, रोक नहीं

Tue, 29 Jul 2014 05:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा में गठित अलग सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) के मुद्दे को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस हेमंत गुप्ता एवं जस्टिस अरुण पल्ली की डिविजन बेंच ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में कोर्ट ने पूछा है कि केंद्रीय एक्ट-1919 के संदर्भ में सिख गुरुद्वारा एक्ट-1925 सेंट्रल सब्जेक्ट है या स्टेट। मामले की सुनवाई पांच सितंबर को होगी।
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हाईकोर्ट ने यह भी पूछा है कि 1919 एक्ट में सिख गुरुद्वारा एक्ट स्थायी सब्जेक्ट है या हस्तांतरित हो सकता है। हाईकोर्ट में केंद्र और पंजाब सरकार के वकीलों ने मौके पर नोटिस ले लिए, जबकि मुख्य सचिव एवं गृह सचिव हरियाणा को एडवोकेट जनरल के जरिये नोटिस भेजा गया है। अन्य प्रतिवादियों में यूटी, एचएसजीएमसी, एसजीपीसी अमृतसर एवं हिमाचल प्रदेश सरकार को भी नोटिस जारी किए गए हैं।

एचएसजीएमसी रद्द करने की मांग

याचिकाकर्ता के वकील ने एक्ट के अमल पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन बेंच ने रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। फिलहाल, याचिकाकर्ता समेत सभी पक्षों को सिख गुरुद्वारा एक्ट-1925 पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

फतेहगढ़ साहिब के एडवोकेट राम सिंह सोमल ने वकील हरचंद सिंह बाठ के माध्यम से याचिका दायर कर एचएसजीएमसी रद्द करने की मांग की थी।

उनकी दलील है कि हरियाणा विधानसभा के पास ऐसा एक्ट बनाने का अधिकार नहीं है, यह केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आता है, लिहाजा एचएसजीएमसी एक्ट रद्द किया जाए, क्योंकि यदि यह एक्ट लागू होता है तो हरियाणा में सिख गुरुद्वारा एक्ट प्रभावी नहीं रहेगा। एक्ट के अमल पर रोक की मांग भी की गई थी।

याचिकाकर्ता की कानूनी दलील

पंजाब पुनर्गठन एक्ट-1966 का सेक्शन-72 इंटर स्टेट बॉडी कारपोरेशंस, जिसमें एसजीपीसी भी शामिल है, से संबंधित है। इस प्रकार एसजीपीसी इंटर स्टेट बॉडी है। स्वायत्त कारपोरेशन के सामान्य प्रावधानों में सेंट्रल एक्ट, स्टेट एक्ट या प्रोविंसिएल एक्ट के तहत पंजाब के लिए गठित इंटर स्टेट बॉडी कारपोरेट उन जगहों में कार्यशील रह सकती है, जहां वह पुनर्गठन से पहले सेवाएं निभा रही हो।

ऐसा तब तक चल सकता है, जब तक केंद्र सरकार कानून में कोई व्यवस्था न करे। ऐसा ही प्रावधान पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट-1947, पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी एक्ट 1961 और सिख गुरुद्वारा एक्ट-1925 पर भी लागू होता है। प्रावधान के प्रति दलील दी गई है कि पंजाब यूनिवर्सिटी और पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के संबंध में प्रावधान है, राज्य सरकारें केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर जारी आदेश या निर्धारण के मुताबिक ही ग्रांट देती हैं।

यह भी कहा गया है कि इंटर स्टेट बॉडी के संबंध में कोई कार्रवाई करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। इस संबंध में कोई भी कार्रवाई केंद्र सरकार ही कर सकती है। ऐसी बॉडी भारतीय संविधान के आर्टिकल-246 के तहत यूनियन लिस्ट की एंट्री-44 में शामिल है और एसजीपीसी भी इनमें से एक है।

ऐसे में एसजीपीसी के कार्यक्षेत्र में कोई राज्य फैसला नहीं ले सकता। कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा बनाया एक्ट स्टेट लिस्ट की एंट्री नंबर-32 के तहत नहीं आता, लेकिन इसी एंट्री के तहत इस एक्ट के बिल का प्रस्ताव लाया गया। इस दलील के साथ आरोप लगाया गया है कि हरियाणा सरकार ने एचएसजीएमसी एक्ट बनाकर संविधान का उल्लंघन किया है।
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ऐसे बना एचएसजीएमसी एक्ट

सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 में अमल में आया। इसमें एसजीपीसी का प्रावधान था। बाद में एक्ट में 1944 और 1959 में संशोधन के साथ एचजीपीसी को इंटर स्टेट बॉडी का दर्जा मिला।

केंद्र ने 1966 में पंजाब पुनर्गठन एक्ट बनाया और इसमें नोटिफिकेशंस से कई संशोधन हुए। सिख गुरुद्वारा एक्ट-1925 पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश एवं यूटी चंडीगढ़ में लागू था। हरियाणा विधानसभा में 11 जुलाई को एचएसजीएमसी बिल लाकर 14 जुलाई को राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद एक्ट बनाया गया।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि विधानसभा के पास यह एक्ट पास करने का अधिकार नहीं है, लिहाजा ऐसा करके हरियाणा सरकार ने संविधान का उल्लंघन किया है।
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