पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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टंकेश्वर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी जिसे सार्वजनिक नहीं किया। हाईकोर्ट को बताया गया कि 9 अक्तूबर को सरकार ने टंकेश्वर कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हुए उसी दिन राज्य की सभी यूनिवर्सिटी को 17 अक्तूबर को स्टूडेंट कौंसिल के चुनाव करवाए जाने के आदेश दे दिए। याचिका में कहा गया कि चुनाव में वोट देने और चुनाव लड़ने से रिसर्च स्कॉलर को वंचित रखा गया है।
यह रिसर्च स्कॉलर के अधिकारों का हनन है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार की गई लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के खिलाफ भी है। साथ ही क्लास रिप्रेजेंटेटिव के चुनाव की प्रक्रिया में भी खामियां है क्योंकि यदि कोई चुनाव नहीं लड़ना चाहता तो ऐसे में क्लास में सबसे ज्यादा अंक लाने वाले छात्र को रिप्रेजेंटेटिव बनाने का प्रावधान है।
साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि यदि कोई क्लास रिप्रेजेंटेटिव का चुनाव जीतता है तो क्या वह ऑफिस बियरर्स का चुनाव लड़ सकते हैं। हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार व विश्वविद्यालयों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही इन खामियों पर सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि कोर्ट को यदि लगेगा तो चुनाव भी खारिज किया जा सकता है।