मृतक कर्मचारी की विधवा को फैमिली पेंशन के लिए 12 साल का इंतजार करवाने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही पेंशन राशि का छह प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए सुरजीत कौर ने एडवोकेट रंजीवन सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि उसके पति 1984 में सिंचाई विभाग में नियुक्त हुए थे। 2009 में पंजाब सरकार ने उसके पति की सेवा नियमित करने का निर्णय लिया था और 2010 में उन्हें भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में नियुक्त कर दिया गया। दुर्भाग्य से वर्ष 2011 में याची के पति की मौत हो गई। इसके बाद बोर्ड ने याची को सरकारी मकान वापस करने को लिखा। 2012 में सरकारी मकान पर ताला लगाकर इसे बोर्ड को वापस कर दिया गया।
याचिकाकर्ता ने इसके बाद फैमिली पेंशन व रिटायरमेंट लाभ के लिए बोर्ड को बार-बार लिखा लेकिन यह राशि जारी नहीं की गई। इसके बाद बोर्ड ने कहा कि सरकारी मकान वापस करने में देरी के चलते सवा तीन लाख रुपये याचिकाकर्ता को जमा कराने होंगे। पंजाब सरकार ने बताया कि अकाउंटेंट जनरल की ओर से आई आपत्ति के चलते यह लाभ जारी नहीं किए जा सके थे। कोर्ट को बताया गया कि लंबित राशि बोर्ड को जमा करा दी गई है। इसके बाद पेंशन एरियर सहित याचिकाकर्ता को जारी कर दी गई है।
हाईकोर्ट ने कहा कि पेंशन कोई इनाम नहीं बल्कि यह याचिकाकर्ता का सांविधानिक अधिकार है जिसके लिए याचिकाकर्ता को 12 साल चक्कर काटने पड़े। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाते हुए यह राशि याचिकाकर्ता को भुगतान करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने माना कि पत्र मिलते ही मकान का कब्जा बोर्ड को वापस दे दिया गया था, ऐसे में इसके लिए लगाए गए सवा तीन लाख रुपये जुर्माने को 6 प्रतिशत ब्याज सहित वापस करने का बोर्ड को आदेश दिया है।