बेअंत सिंह हत्याकांड के अभियुक्त जगतार सिंह तारा की ओर से हाईकोर्ट में खुद पैरवी करने की अर्जी पर जारी नोटिस में प्रशासन ने जवाब दाखिल करके कहा है कि वह खतरनाक अपराधी है और जिन धाराओं के तहत उसके खिलाफ मामला चल रहा है, नियमानुसार उसे जेल से बाहर ही नहीं लाया जा सकता। प्रशासन के इस जवाब के साथ हाईकोर्ट ने सुनवाई लंबे समय तक स्थगित कर दी है।
तारा बेअंत हत्याकांड के अलावा बुड़ैल जेल ब्रेक केस में भी आरोपी है। उसे विदेश में धरे जाने के बाद पंजाब पुलिस वापस लाई थी और बेअंत सिंह हत्याकांड के ट्रायल के लिए उसे बुड़ैल जेल में चंडीगढ़ लाया गया था। इसी दौरान तारा ने जिला अदालत में एक अर्जी दाखिल करके कहा था कि बेअंत हत्याकांड में पैरवी में मदद के लिए वह अपने सहअभियुक्तों से जेल में मुलाकात करना चाहता है। इसके अलावा उसने जेल से ही अपने परिजनों से फोन पर बातचीत करने और तिहाड़ जेल में बंद जगतार सिंह हवारा एवं परमजीत सिंह भ्योरा से भी उनकी पेशियों के दौरान मुलाकात करने की इजाजत मांगी थी।
तारा की अर्जी पर सुनवाई करते हुए जिला अदालत ने फोन पर बात करने और बुड़ैल जेल में बंद सहअभियुक्तों से मुलाकात करने की इजाजत दे दी थी। जिला अदालत के इस फैसले को जेल सुपरिंटेंडेंट ने प्रशासन के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसी अपील पर तारा को नोटिस जारी हुआ था।
तारा ने जेल प्रशासन के माध्यम से हाईकोर्ट में अजी दाखिल की थी कि वह इस मामले में हाईकोर्ट में निजी तौर पर पेश होकर स्वयं पैरवी करना चाहता है, लिहाजा इसकी इजाजत दी जानी चाहिए। इस अर्जी पर प्रशासन को नोटिस जारी हुआ था।
जेल प्रशासन ने बुधवार को जवाब दाखिल किया है कि तारा खतरनाक अपराधी है। जिन धाराओं के तहत उसके खिलाफ मामला चल रहा है, नियम उन धाराओं में ऐसे अपराधियों को जेल से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं देता, लिहाजा तारा की यह मांग रद्द की जानी चाहिए।