वरिष्ठता के पैमाने से जुड़े विवाद के कारण पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जारी होने वाली पुलिस अधिकारियों की प्रमोशन सूची पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि यदि विवाद का निपटारा करने से पहले प्रमोशन हुआ तो कुछ जूनियर सीनियर हो जाएंगे और सीनियर जूनियर। विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता हरियाणा पुलिस में कार्यरत हैं।
हरियाणा पुलिस में अधिकारियों की नियुक्ति दो प्रकार से होती है एक तो सीधी भर्ती और दूसरी प्रमोशन से। याची ने कहा कि नियमों के अनुसार प्रोबेशन पीरियड को वरिष्ठता सूची तैयार करते हुए सर्विस में शामिल नहीं किया जाता। इसके चलते प्रोबेशन खत्म कर कन्फर्म होने की तिथि से ही वरिष्ठता जोड़ी जाती है। याची ने कहा कि यह गलत है क्योंकि इससे कई बार ऐसा होता है कि प्रमोशन से आए जूनियर भी अपने समकक्ष अधिकारियों से वरिष्ठता में सीनियर हो जाते हैं।
इसका सबसे बड़ा नुकसान प्रमोशन के समय होता है। याची ने बताया कि उदाहरण के अनुसार याची इंस्पेक्टर ने 2009 में ज्वाइन किया और 2011 में उसका प्रोबेशन पूरा हुआ और उसे कन्फर्म हुआ और वहीं एक प्रमोटी 2010 में इंस्पेक्टर बना। अब अगर नियुक्ति की तिथि से देखे तो याची सीनियर हुआ लेकिन अगर हरियाणा सरकार के नियम से देखें तो वह प्रमोटी का जूनियर होगा कन्फर्म होने की तिथि से वरिष्ठता जोड़ी जाती है।
याची ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी कई मामलों में इसे अवैध करार दे चुका है बावजूद इसके यह नियम का हिस्सा है। याची ने बताया कि शुक्रवार को ही हरियाणा पुलिस के एसआई से इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर से डीएसपी की प्रमोशन सूची जारी होनी है जो इसी नियम के अनुसार है। हाईकोर्ट ने सूची पर रोक लगाते हुए कहा कि यदि यह सूची जारी होगी तो जूनियर सीनियर हो जाएंगे और सीनियर जूनियर। ऐसे में पहले हाईकोर्ट इस विवाद का निपटारा करेगा और तब तक रोक जारी रहेगी।