पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के 5200 पॉलिटेक्निक छात्रों को 6 मई से आरंभ होने वाली परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी है। हालांकि हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा का परिणाम हाईकोर्ट द्वारा इस याचिका पर सुनाए गए फैसले पर निर्भर होगा।
पंजाब अनएडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूशन एसोसिएशन ने याचिका दाखिल करते हुए सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने बताया कि 2017 में छात्रों को प्रवेश देने के बाद 15 अगस्त तक छात्रों की सूची वेबसाइट पर अपलोड करनी थी। याचिकाकर्ता कॉलेज ऐसा नहीं कर पाए जिसके चलते पंजाब स्टेट बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन एंड इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग ने उनके छात्रों की परीक्षा लेने से इनकार कर दिया था।
तब सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दाखिल की गई थी और हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से ही दिसंबर 2018 की परीक्षा ये 5200 छात्र दे सके थे। 21 दिसंबर को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया था जिसके चलते छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।
याची ने हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ के समक्ष अपनी दलीलें रखीं। इस बीच पंजाब सरकार की ओर से कहा गया कि प्रवेश की अंतिम तिथि के बाद भी इन संस्थानों ने छात्रों को प्रवेश दिया और इसी कारण उन्होंने समय पर यह सूची अपलोड नहीं की जो सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।
याची ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इस प्रकार छात्रों का भविष्य दांव पर नहीं लगाया जा सकता। जिसके बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए इन 5200 छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी है। हाईकोर्ट के इस आदेश के चलते अब छात्र 6 मई से आरंभ होने वाली परीक्षाओं में बैठ सकेंगे।