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Chandigarh News: हाईकोर्ट ने लड़की को माना नाबालिग, परिजनों संग भेजा

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समलैंगिक जोड़ा: आधार अथॉरिटी को कथित बंधक लड़की की आयु से जुड़े दस्तावेज सील कवर में सौंपने का आदेश
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अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। समलैंगिक लड़की को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उसकी साथी को सौंपने से इन्कार करते हुए परिजनों संग भेजने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्ट्या हरदोई से लाकर हाईकोर्ट में पेश की गई लड़की को नाबालिग माना और सहमति संबंध मे रहने की दलील देने वाली याचिकाकर्ता को कस्टडी से जुड़े दावे के संबंध में अगली सुनवाई पर दलीलें पेश करने का आदेश दिया है। सोमवार को पंचकूला पुलिस ने कोर्ट के आदेश के अनुसार उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से लाई गई लड़की को अदालत में पेश किया। याचिका दाखिल करने वाली लड़की ने अपनी सहमति संबंध साथी को परिजनों की अवैध हिरासत में बताया था और अदालत के आदेश पर लड़की को हाईकोर्ट में पेश किया गया। लड़की ने हाईकोर्ट में कहा कि वह अपनी सहमति संबंध साथी के साथ रहना चाहती है और परिजनों के साथ नहीं जाना चाहती। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि फिलहाल हमारे पास युवती का हरदोई के स्कूल की ओर से जारी प्रमाणपत्र है जिसके अनुसार वह बालिग नहीं है। ऐसे में हाईकोर्ट ने लड़की को परिजनों को सौंपने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने आधार अथॉरिटी के वकील को बताया कि वर्तमान में हाईकोर्ट के रिकार्ड पर कथित तौर पर बंधक बनाई गई लडक़ी के दो आधार कार्ड मौजूद हैं। अगली सुनवाई पर वह दस्तावेज सील कवर में हाईकोर्ट में सौंपे जाएं जिसके आधार पर जन्म तिथि में संशोधन किया गया।

बच्ची से काम करवाया तो भेज देंगे जेल

सुनवाई के दौरान बंधक बनाई गई लड़की से हाईकोर्ट ने पूछा कि वह क्या करती है तो उसने बताया कि वह एक कोठी पर सफाई का काम कर रही थी। इसपर हाईकोर्ट ने उसके परिजनों को फटकार लगाते हुए कहा कि आपको पता नहीं है क्या, बाल मजदूरी अपराध है। हम आपको आपकी बेटी सौंप रहें है लेकिन इससे कोई काम नहीं करवाया जाएगा और न ही मार-पीट होगी। यदि ऐसा पाया गया तो माता-पिता दोनों को जेल भेज दिया जाएगा। साथ ही पुलिस के रवैए पर भी सवाल उठाते हुुए कहा कि क्या आपको पता नहीं है कि आपके इलाके में बाल मजदूरी हो रही है।
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पुलिस पर उठे सवाल

हरदोई से लड़की को लाने के बाद उसे आशियाना में रखा गया और उसका ऑसिफिकेशन टेस्ट करवाया गया ताकि उसकी उम्र की जानकारी दी जा सके। यह जानकारी जैसे ही पुलिस ने हाईकोर्ट को दी तो पुलिस को फटकार लगाते हुए जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा कि किसके आदेश पर लड़की को आशियाना भेजा गया और उसका टैस्ट करवाया गया। कोर्ट ने पुलिस को इस रवैए के लिए अदालत में चेतावनी दी। याचिका में आरोप था कि दोनों लड़कियों को पुलिस थाने लेकर गए थी और उनका उत्पीड़न किया गया और पिटाई की गई। इन आरोपों पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर पंचकूला पुलिस को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

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