कोविड प्रोटोकॉल को तोड़ने पर हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ में दर्ज की गई धारा 188 के तहत लोगों पर दर्ज 1112 एफआईआर को रद्द करने का पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया है। माननीयों पर लंबित आपराधिक मामलों का जल्द निपटारा करने के लिए हाईकोर्ट की ओर से लिए गए संज्ञान के मामले में यह आदेश जारी किया गया है।
हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ से आंकड़े मांगे गए थे कि उनके क्षेत्र में माननीयों पर कितने आपराधिक मामले लंबित हैं। आंकड़े देखने के बाद कोर्ट ने पाया कि कई नेताओं पर कोरोना नियमों के उल्लंघन के चलते धारा 188 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। ऐसे हजारों केस आज भी अदालतों में चल रहे हैं। इनमें कई राजनेता भी शामिल थे।
हाईकोर्ट ने कहा था कि महामारी का वो समय अब गुजर चुका है और ये हजारों केस अब भी अदालतों में पेंडिंग हैं। इससे अदालतों में कामकाज प्रभावित हो रहा है, ऐसे में ऐसे सभी केसों का एक साथ निपटारा किए जाने के लिए हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए इन सभी केसों के ट्रायल पर रोक लगा दी थी।
घरों से निकलने की मजबूरी
हाईकोर्ट ने कहा था कि कोरोना महामारी के दौरान तब ऐसे हालात थे कि लोगों को बचाने के लिए नियमों को सख्ती से लागू किया गया था। लोग बड़े पैमाने पर आदेशों का पालन कर रहे थे, लेकिन ऐसी आकस्मिक स्थितियां हो सकती थीं, जिसने उन्हें भोजन, दवा आदि की आवश्यकता पूरी करने के लिए आदेशों का उल्लंघन करते हुए अपने घरों से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा होगा।
केसों को लंबा खींचने की जरूरत नहीं
अब हालात बदल चुके हैं ऐसे में अब इन केसों को और लंबा खींचे जाने की जरूरत नहीं। उस दौरान दर्ज किए यह हजारों केस अदालत में पेंडिंग हैं और अदालतों पर इन केसों का भारी बोझ है, इसलिए इन केसों का निपटारा किया जाना जरूरी है।
चंडीगढ़ में दर्ज हुए थे 84 केस
अब हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 15 मार्च 2020 से 28 मार्च 2022 के बीच दर्ज ऐसी 1112 एफआईआर रद्द करने का आदेश दे दिया है। यह आदेश माननीयों के साथ-साथ आम लोगों पर भी लागू होगा। पंजाब में 859, हरियाणा में 169 और चंडीगढ़ में 84 एफआईआर लंबित हैं।