मोहाली नगर निगम मेयर के चुनाव पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस जसवंत सिंह की एकल बेंच ने मंगलवार को रोक लगा दी है। चुनाव बुधवार को होना था। हाईकोर्ट ने 25 मार्च तक का नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और तब तक मेयर चुनाव को लेकर मीटिंग नहीं करने का निर्देश दिया है।
पार्षद मनजीत सिंह सेठी, हरपाल सिंह चाना और अमरीक सिंह तहसीलदार ने अलग-अलग दो याचिकाओं में सरकार का वह कार्यक्रम रद्द करने की मांग की, जिसमें मेयर का चुनाव महिला के लिए आरक्षण के प्रावधान के तहत करने का कार्यकारी आदेश दिया गया था।
सेठी के वकील कमलजीत सिंह ने बेंच को बताया कि पंजाब म्युनिसिपल एक्ट-1976 के तहत वर्ष 1996 में 100 नगर निगमों के लिए मेयर पद के आरक्षण का प्रावधान किया गया था। उस वक्त पंजाब में केवल चार नगर निगम होते थे। बाद में बठिंडा नगर निगम बना तो इसी हिसाब से आरक्षण जारी किया गया।
हाईकोर्ट को बताया गया कि इस प्रावधान में 2008 में और बाद में 2012 में संशोधन किया गया। पहले अंग्रेजी वर्णमाला के हिसाब से नगर निगमों के नाम की रोटेशन आती थी, लेकिन वर्ष 2008 में वर्णमाला का आधार ही खत्म कर दिया गया। बाद में प्रावधान बनाया गया कि क्रम के हिसाब से आरक्षण तय किया गया।
इसी बीच वर्ष 2011 में चार और नगर निगम बने और मोहाली का क्रम नौवें स्थान पर आता है। इस लिहाज से भी 17वें नंबर पर बनने वाले नगर निगम के मेयर पद पर महिला आरक्षण आता है, जबकि भविष्य में 10वें नंबर बनने वाले किसी नगर निगम के मेयर के पद पर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण बनता है। इस दलील के साथ कहा गया है कि मोहाली पर अभी महिला से पहले अनुसूचित जाति का आरक्षण बनता है।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की पैरवी पर एडवोकेट जनरल को तलब किया, लेकिन वह मौजूद नहीं थे। मंगलवार दोपहर बाद अतिरिक्त एडवोकेट जनरल केएस सिद्धू पेश हुए और कहा कि अभी तुरंत इस मामले में वह कुछ नहीं कह सकते। चुनाव आगे भी टाला जा सकता है। हाईकोर्ट ने फिलहाल आरक्षण पर जवाब तलब करते हुए मेयर के चुनाव पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।