इसके बाद याची को नवंबर 2017 की परीक्षा के लिए डिस्क्वालिफाई करार दे दिया गया। याची ने इसके खिलाफ सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दाखिल की, जिसे सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ डिवीजन बेंच के समक्ष याचिका सुनवाई के लिए पहुंची। मामले को गंभीरता से लेते हुए चीफ जस्टिस ने केस का रिकॉर्ड मंगवा लिया।
अगर कागज पर गाना लिखा हो तो भी केस बना दोगे क्या?
रिकार्ड देखने के बाद चीफ जस्टिस ने विषय विशेषज्ञ को कोर्ट में पेश करने को कहा था। बुधवार को विशेषज्ञ को उत्तर पुस्तिका और पकड़ी गई नकल सामग्री सौंपकर पूछा गया कि क्या यह सामग्री छात्र पेपर में इस्तेमाल कर सकता था। विशेषज्ञ ने कहा कि दोनों का दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी को फटकार लगाते हुए कहा कि विशेषज्ञ ने पांच मिनट में बता दिया कि पेपर का सामग्री से कोई वास्ता नहीं है तो क्या फ्लाइंग टीम ने बिना दिमाग लगाए और आंखें मूंदकर यूएमसी बना दी।
फ्लाइंग टीम बिना दिमाग लगाए अंधा बनकर किसी भी कागज को स्वीकार कर लेगी क्या। अगर कागज पर गाना लिखा हो तो भी केस बना दोगे क्या। आप शिक्षक हैं, देश का भविष्य बनाने की जिम्मेदारी आप पर है। आप कैसे किसी छात्र का भविष्य दांव पर लगा सकते हो। कोर्ट ने कहा कि ऐसे प्रबंधन, शिक्षक और यूनिवर्सिटी के वीसी को तुरंत बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए।