कार्मल हादसे के एक माह बाद अटेंडेंट शीला को अस्पताल से छुट्टी मिली
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चंडीगढ़ सेक्टर-9 स्थित कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में 250 साल पुराना हेरिटेज पेड़ गिरने से हुए हादसे को एक महीना हो गया है, लेकिन अब तक प्रशासन यह नहीं तय कर पाया है कि किसकी लापरवाही से 16 वर्षीय हीराक्षी को जान गंवानी पड़ी और शीला को एक महीना अस्पताल में रहना पड़ा। घायलों को भी मुआवजा मिल चुका है, लेकिन लोगों को आज तक नहीं पता चला कि जिम्मेदार कौन है।
8 जुलाई को हादसे के बाद प्रशासन ने उसी दिन मजिस्टीरियल जांच के आदेश दे दिए थे। एक हफ्ते में डीसी ने रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन जांच पूरी होने से पहले ही उसे बंद कर दिया गया। 13 जुलाई को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज जितेंद्र चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। उनकी जांच अभी जारी है। प्रशासन के सलाहकार धर्मपाल का कहना है कि वह रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। उसके आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी। हादसे की घटना के दिन प्रशासन के तमाम विभाग सक्रिय हो गए थे। पुलिस ने अज्ञात पर केस दर्ज कर लिया। समाज कल्याण विभाग ने चाइल्ड सेफ्टी ऑडिट के आदेश दिए। शिक्षा विभाग ने स्कूलों और इंजीनियरिंग विभाग ने शहर में सूखे पेड़ों का सर्वे कराने का आदेश दिया गया। कई हेरिटेज पेड़ों के सर्वे के आदेश हुए। जांच भी की गई। कुछ पेड़ों को काटा भी गया। अब एक महीना बीतने के बाद सभी ढीले पड़ते हुए नजर आ रहे हैं।
एक महीने बाद भी प्रशासन के हाथ खाली
मजिस्टीरियल जांच को यह कह कर बंद कर दिया गया कि सेवानिवृत्त जज पूरे मामले की जांच करेंगे। 13 जुलाई को जांच की जिम्मेदारी जस्टिस (सेवानिवृत्त) जितेंद्र चौहान को सौंप दी गई। वह जांच कर रहे हैं कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है। बीते दिनों वह घटनास्थल पर भी गए और स्कूल स्टाफ के साथ बातचीत थी लेकिन हादसे के एक महीने बाद भी प्रशासन के हाथ खाली हैं। हालांकि शहरवासी व हीराक्षी के परिजन अभी तक सवाल के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। शहर में अभी भी कई पेड़ लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। लगातार प्रशासन और नगर निगम के हॉर्टिकल्चर विभाग के पास पेड़ों की प्रूनिंग को लेकर शिकायतें आ रही हैं।