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बागवानी का ऐसा शौक, एक हजार गमलों में लगाए पौधे, घर पर ही बना ली नर्सरी 

Tue, 15 Dec 2020 02:15 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ में एडवोकेट जेसी तूर के घर की छत पर बनाई गई नर्सरी। - फोटो : अमर उजाला
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पेड़ पौधों से प्यार करने वालों के लिए उनके घर में बने बगीचे उनके परिवार की तरह हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही मानते हैं चंडीगढ़ के सेक्टर 21 में रहने वाले जेसी तूर। पेशे से एडवोकेट तूर ने बगीचे को इस तरह से बनाया है कि कोई भी इसकी तारीफ किए बिना नहीं रह सकता। 

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करीब 1000 गमलों से सजे उनके बगीचे में विभिन्न किस्मों के पौधे और फूल हैं। घर के आंगन में भी उन्होंने हरा भरा लॉन बनाया है। घर की छत पर नर्सरी बनाई हुई है, जिसमें वह पौधे तैयार करते हैं। तूर का कहना है कि मेरे लिए यह बगीचा ही नहीं, मेरे परिवार का एक हिस्सा है। इसे इस तरीके से बनाया गया है कि इसे देखकर खुशी के साथ सकारात्मक सोच भी मिलती है।

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जेसी तूर ने बताया कि उनका बेटा अभिराज भी उनके इस काम में उनका हाथ बंटाता है। उन्होंने बताया कि उन्हें शुरू से ही बागवानी का शौक रहा है। धीरे-धीरे यह शौक जुनून में बदल गया। इसके लिए घर में 25 साल पहले गार्डन बनवाया। इसके बाद से इस गार्डन की देखभाल करना रुटीन बन गया। बगीचे में उन्होंने कई किस्मों के फूल लगाए हैं। इनमें गुलदाउदी के फूल सबसे अधिक हैं। 

तूर ने कहा कि आजकल कोविड के चलते हर किसी के मन में डर बैठा हुआ है। ऐसे में अपने घर के बने बगीचे में बैठकर सबकुछ भूल जाता हूं। यहां पर बैठकर मुझे और परिवार के अन्य मेंबर्स को सकारात्मक सोच आती है।
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घर पर ही तैयार करते हैं खाद
तूर ने बताया कि वह गार्डन में रखे हुए पौधों का खुद ही ध्यान रखते हैं। गार्डन में रखे पौधे और फूलों के लिए वह घर पर ही खाद तैयार करते हैं। गिरे पत्तों को जमीन में डाल देते हैं और कुछ महीने बाद इनसे तैयार खाद को गमलों और गार्डन के विभन्न्न हिस्सों में डालते हैं। उनका कहना है कि गार्डन में रखे फूलों को कीड़ा न लगे इसके लिए वह नीम के पत्तों से तैयार किया गया पानी सभी गमलों में डालते हैं।

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