गौरतलब है कि दूसरे सत्र में मंगलवार को पांच की जगह चार केंद्रों पर ही टीकाकरण किया गया है। वैक्सीन न मिलने के कारण पीजीआई में टीकाकरण नहीं किया गया। इसके बावजूद चारों केंद्रों पर परिणाम पहले सत्र की तुलना में बेहद निराशाजनक रहे। जीएमएसएच-16 ने पहले सत्र में जहां शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया था, वहीं दूसरे सत्र में यहां 100 में से 90 स्वास्थ्यकर्मियों का ही टीकाकरण हो पाया।
जीएमसीएच-32 के दोनों केंद्रों पर यह संख्या 64 पर ही सिमट कर रह गई। वहीं, सेक्टर-45 के सिविल अस्पताल में महज 20 लाभार्थियों का टीकाकरण हो पाया। इस दौरान इक्का-दुक्का लाभार्थियों ने छोटी-मोटी परेशानियों की शिकायत की लेकिन किसी को भी कोई ऐसी गंभीर समस्या नहीं हुई, जिसके लिए राष्ट्रीय सहायता केंद्र या जीएमसीएच व पीजीआई के विशेषज्ञों की गठित कमेटी से मदद मांगी जाए।
सुबह नौ की जगह साढ़े दस बजे शुरू हुआ टीकाकरण
दूसरे सत्र के टीकाकरण के लिए सुबह 9 बजे का समय निर्धारित किया गया था लेकिन जीएमएसएच-16 के अलावा अन्य तीनों केंद्रों पर 10 बजे तक न तो लाभार्थी पहुंचे थे, न कर्मचारी। ऐसे में सुबह 10:30 बजे टीकाकरण शुरू हो पाया। सबसे शर्मनाक स्थिति सेक्टर-45 के सिविल अस्पताल में देखने को मिली वहां दोपहर में 1:30 बजे टीकाकरण शुरू हुआ।
स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अमनदीप कंग ने बताया कि टीकाकरण का अगला सत्र अब गुरुवार को चलेगा। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत चलाए जा रहे केंद्रों की संख्या चार ही रहेगी क्योंकि सरकार का यह निर्देश है कि टीकाकरण अभियान के साथ ही अन्य सेवाएं भी सुचारु रूप से संचालित होनी चाहिए।
जीएमएसएच-16 में चल रहा जागरूकता कार्यक्रम
टीकाकरण अभियान में लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए जीएमएसएच-16 में दिन के साथ ही रात में भी कर्मचारियों द्वारा जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
डॉक्टर कंग ने बताया कि इसके लिए टीकाकरण करा चुके सभी डॉक्टरों व कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वह अपने ड्यूटी में इसे भी शामिल करें। जिनकी दिन में ड्यूटी है, वह ओपीडी के साथ ही वार्ड में तैनात डॉक्टरों व कर्मचारियों को अपना अनुभव बता रहे हैं।
ठीक यही प्रक्रिया रात में भी दोहराई जा रही है। डॉ. कंग का कहना है कि ऐसा करके ही टीकाकरण में लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। ऐसा अनुमान है कि जिन स्थानों पर टीकाकरण का परिणाम संतोषजनक नहीं है, वहां जागरूकता के लिए प्रयास नहीं किया जा रहा।
पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर रविंद्र खैवाल का कहना है कि टीकाकरण अभियान में लाभार्थियों की कम होती संख्या की सबसे बड़ी वजह नकारात्मक सूचनाओं की तीव्रता है। स्वास्थ्य विभाग को इस पर अंकुश लगाने का उपाय करना होगा ताकि इस टीकाकरण के महत्व को लोगों के जहन में उतारा जा सके। वहीं, जीएमसीएच-32 के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रवि गुप्ता इसे कार्य योजना की विफलता मानते हैं।
उनका कहना है कि जिस टीके को लगवाने के लिए भीड़ उमड़ जानी चाहिए थी, उसके लिए लाभार्थी ढूंढने पड़ रहे हैं। इससे यह साफ पता चल रहा है कि जागरूकता के स्तर पर प्रयास काफी सीमित हो रहे हैं इसलिए सबसे पहले लोगों को इस अभियान से जोड़ने का प्रयास करना होगा। टीकाकरण की कार्य योजना की ही तरह जागरूकता संबंधी कार्य योजना को लेकर गंभीरता दिखानी होगी तभी अभियान की सफलता सुनिश्चित हो पाएगी।
कहां कितने लोगों को लगा टीका
- जीएमएसएच-16- 90
- जीएमसीएच-32 के दो केंद्रों पर क्रमश: - 35 और 29
- सिविल अस्पताल सेक्टर-45 - 20