सरविक्स कैंसर की पहचान जितनी जल्दी हो जाए, उतना अच्छा होता है। इस कैंसर के शुरुआती कोई लक्षण नहीं होते। जब तक इसका पता चलता, तब तक काफी देर हो चुकी होती है। यह अक्सर असुरक्षित यौन संबंध के कारण होता है।
भारत की महिलाओं में यह कैंसर काफी तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके प्रति जागरूकता काफी कम है। अमेरिका में तो रोकथाम के लिए वैक्सीन कार्यक्रम शुरू किया जा चुका है। सबसे जरूरी इसकी पहचान करना है।
बीस की उम्र पार करते ही हर युवती को गाइनोकोलॉजिस्ट से इसकी जांच करवानी चाहिए। यदि यह पनप गया है तो उसका इलाज मुश्किल हो जाता है।
पीजीआई में हिस्टोपैथोलॉजी विभाग की चल रही सीएमई 2014 में हिस्सा लेने आए यूएसए के हार्टफोर्ड के डाक्टर श्रीणी मंडाविल्लि ने बताया कि सरविक्स कैंसर के लिए पेप टेस्ट होता है, जो हर युवती और महिलाओं को रूटीन में करवाना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत में इसके बारे में बहुत कम जागरूकता है।
कैसे होता है सरविक्स कैंसर :
सरविक्स कैंसर ह्यूमन पेपीलोमा वायरस (एचपीवी) की मौजूदगी से होता है। डाक्टर श्रीणी ने बताया कि सरविक्स कैंसर की सबसे ज्यादा संभावना असुरक्षित यौन संबंध बनाने के दौरान होती है।
संबंध के दौरान ही एचपीवी शरीर के अंदर प्रवेश करते हैं। यह वायरस पुरुष और महिलाओं दोनों में पाया जाता है। जब यह वायरस पूरी तरह से अपना ठिकाना बना लेता है, तभी इसके बारे में कुछ पता चलता है। शुरुआती दौर में इसके लक्षण नहीं दिखते। इस कारण यह सलाह दी जाती है कि हर साल एक बार महिला पेप टेस्ट जरूर करवाए।
अमेरिका में 16 साल की युवती के लिए वैक्सीन प्रोग्राम
डा. श्रीणी के मुताबिक अमेरिका ने इस कैंसर को रोकने के लिए दो साल पहले वैक्सीन प्रोग्राम बनाया है। इस प्रोग्राम के तहत हर 16 साल की उम्र आते ही युवती को वैक्सीन दी जाएगी।
जिस प्रकार से यहां पर पल्स पोलियो का कार्यक्रम चलाया जा रहा है, ठीक उसी तरह से अमेरिका में यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। उसके बाद यदि कोई युवती किसी के संपर्क में आती भी है तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।