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स्वास्थ्य मंत्री नड्डा का एलान, पीजीआई होगा पेपरलेस

Thu, 31 Dec 2015 09:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पीजीआई में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सुविधा का अधिकारिक तौर पर उद्घाटन के करने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य पीजीआई और एम्स को पेपरलेस बनाना है।
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पीजीआई जल्द ही इस दिशा की ओर काम शुरू कर देगा। केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट में पूरी मदद देगा। उन्होंने संस्थान के डायरेक्टर योगेश चावला से कहा कि जब वे अगली बार आएंगे तो उन्हें उम्मीद है कि पीजीआई ने इस दिशा में काफी काम लिया होगा।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के जन्मदिवस पर मनाए जा रहे गुड गवर्नेंस वीक का एक हिस्सा है। यह सुविधा उन्हीं के लिए समर्पित हैं। इसका फायदा मरीजों को मिल रहा है। एम्स में देखा गया कि मरीजों को रजिस्ट्रेशन में चार से पांच घंटे लग जाते थे, लेकिन इस सुविधा के शुरू होने से मात्र कुछ ही मिनट में मरीज का रजिस्ट्रेशन हो जाता है।
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इससे मरीजों का काफी समय बचता है। पीजीआई को यह सुविधा शुरू करने के लिए 25 दिसंबर तक का वक्त दिया गया था, जिसे पीजीआई ने न सिर्फ समय पर काम पूरा किया बल्कि इसमें पुराने पेशेंट के लिए भी रजिस्ट्रेशन सुविधा शुरू कर दी।

सेंट्रल सापिस्टकेटेड इंस्ट्रूमेंट सेल का उद्घाटन
उन्होंने कहा कि पीजीआई के पास कुछ ऐसी सुविधाएं हैं, जो अन्य संस्थानों के पास नहीं है। दूसरे हास्पिटल्स की फेकल्टी को पीजीआई का दौरा करना चाहिए, ताकि उन्हें यहां से कुछ सीखने को मिले। इस दौरान सेंट्रल सापिस्टकेटेड इंस्ट्रूमेंट सेल का भी उद्घाटन किया। यह सेल खोज में काफी मददगार साबित होगा।

टेली एविडेंस से बचाए 192 लाख रुपये
नड्डा ने इस दौरान टेली-एविडेंस सुविधा का भी उद्घाटन किया। टेली-एविडेंस सुविधा वाला पहला संस्थान बन गया है। इससे न सिर्फ डॉक्टरों का समय बचा, बल्कि लाखों रुपये भी बचाए। जो समय बचा, उस समय का उपयोग डॉक्टरों ने मरीजों के लिए किया। पीजीआई ने बताया कि हर साल पंजाब, हरियाणा, हिमाचल व अन्य प्रदेशों से करीब दो हजार समन आते हैं। साल 2015 में 1854 समन आए।

इनमें 1172 केसों में टेलीएविडेंस सक्सेसफुल रही। इससे 485748 किलोमीटर की यात्रा डॉक्टरों की बच गई। प्रत्येक एविडेंस में खर्च होने वाले डॉक्टरों के आठ घंटे बच गए। इन जगहों पर जाने के लिए खर्च होने वाले 192 लाख रुपये बच गए। इसी तरह से 1.93 टन कागज भी बच गया, जिनके प्रिंट निकाले जाने थे।
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