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चंडीगढ़: तैयारियां अधर में, तीसरी लहर बरपा सकती है कहर, दो ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट नहीं हो सके अभी शुरू

Wed, 22 Dec 2021 05:41 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग का कहना है कि भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार सभी जरूरी दवाओं और इंजेक्शन के भरपूर स्टॉक उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इसके साथ ही 16 एंबुलेंस की व्यवस्था है। 
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जीएमएसएच-16 का नर्सिंग हॉस्टल, जहां बच्चों के लिए अस्पताल बनाने की तैयारी चल रही। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। चंडीगढ़ में कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने के साथ ही मौत का सिलसिला भी बढ़ने लगा है। महज तीन दिनों में तीन मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। तीसरी लहर से बचाव की तैयारियों को लेकर प्रशासन ने प्रत्येक स्तर पर व्यवस्था पूरी होने का दावा किया है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। 

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प्रस्तावित ऑक्सीजन प्लांट शुरू नहीं हुए। बच्चों के अस्पताल का काम भी अब तक कागजों में ही सीमित है। टीकाकरण का लक्ष्य भी अब तक अधूरा है। इतना ही नहीं जिन रेजिडेंट डॉक्टरों ने दूसरी लहर में योद्धा की भूमिका निभाई थी, वे भी साथ छोड़ चुके हैं। ऐसे में तीसरी लहर पर किस हद तक काबू पाया जा सकेगा, यह मौजूदा समय का बड़ा सवाल है। 
 
हालांकि पीजीआई, जीएमसीएच-32 व जीएमएसएच-16 में विशेषज्ञों की कमी नहीं है लेकिन पैरा-मेडिकल स्टाफ में खासतौर पर नर्सिंग स्टाफ की कमी परेशानी दे सकती है, क्योंकि पीजीआई में नर्सिंग ऑफिसर के 1500 और जीएमसीएच-32 में 656 नए पद सृजन की फाइल वर्षों से लंबित है। वहीं पुराने नियमित पदों की तुलना में मरीजों की संख्या 5 गुना से भी ज्यादा हो गई है।

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टीकाकरण का लक्ष्य भी रह गया अधूरा 
कोरोना टीकाकरण की शुरुआत 16 जनवरी 2021 को की गई थी। इसके अंतर्गत पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाया गया। उसके बाद धीरे-धीरे अन्य लोग भी अभियान से जुड़ते गए। अभियान के अंतर्गत शहर की लक्षित लाभार्थियों को पहली खुराक लगाने का लक्ष्य 14 अगस्त 2021 को पूरा कर लिया गया है लेकिन दूसरी खुराक का लक्ष्य पूरा करना स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। प्रशासन ने लाभार्थियों को आकर्षित करने के लिए लकी ड्रा तक का उपाय आजमा लिया है लेकिन उसमें भी कुछ खास सफलता नहीं मिल सकी है। लगभग 20 प्रतिशत आबादी को अब तक दूसरी खुराक नहीं लग पाई है। 

                                      जीएमएसएच-16 में लगाया गया ऑक्सीजन प्लांट।

कुछ यूं है टीकाकरण का ग्राफ 
  • हेल्थ केयर वर्कर: पहली खुराक 103.96 प्रतिशत, दूसरी खुराक 96.09
  • फ्रंट लाइन वर्कर: पहली खुराक 215.65 प्रतिशत, दूसरी खुराक 353.58 प्रतिशत 
  • 18 साल से ऊपर के लाभार्थी: 104.36 प्रतिशत और दूसरी खुराक 82.16 प्रतिशत

जीएमएसएच-16 और जीएमसीएच-32 में नहीं लगे दो ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट 

कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने समय रहते हुए इस कमी को दूर करने का निर्देश दिया था लेकिन तीसरी लहर की दस्तक हो जाने के बावजूद प्रस्तावित ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट शुरू नहीं हो पाए हैं। योजना के तहत जीएमएसएच-16 और जीएमसीएच-32 में 800-800 एलपीएम के दो प्लांट लगाए जाने थे। प्रशासन भी उसे दिसंबर के दूसरे हफ्ते तक शुरू करने का दावा कर रहा था लेकिन अब तक कंपनी ने अस्पतालों का दौरा भी नहीं किया है। प्लांट लगाना और शुरू होना तो दूर की बात है। 

यहां है इतनी ऑक्सीजन की व्यवस्था 
पीजीआई: दो हजार एलपीएम 
जीएमएसएच-16: 500 एलपीएम
जीएमसीएच-32: एक हजार एलपीएम
सेक्टर-48 अस्पताल: 100 एलपीएम
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बच्चों के अस्पताल के लिए सिर्फ कार्ययोजना ही बन रही 

तीसरी लहर में बच्चों पर मंडराते खतरे को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने 32 बेड के आईसीयू अस्पताल के साथ ही दो 20-20 बेड के ऑक्सीजन यूनिट बनाने को कहा था। इसके अंतर्गत सेक्टर-45 और 22 के सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन बेड की यूनिट तो स्थापित कर दी गई है लेकिन आईसीयू अस्पताल की योजना अब भी ठंडे बस्ते में है। यह अस्पताल जीएमएसएच-16 के नर्सिंग हॉस्टल के खाली पड़े भवन में बनाया जाना था लेकिन हॉस्टल अब तक वैसे ही खाली पड़ा हुआ है, जबकि यह कार्य योजना तीन महीने पहले तैयार की गई थी। 

सेक्टर-48 अस्पताल में भी नहीं बदली व्यवस्था 
दूसरी लहर के दौरान बेड कम पड़ने पर प्रशासन ने सेक्टर-48 के 100 बेड के अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाया था। अब भी वही व्यवस्था लागू है लेकिन दूसरी लहर में जिन परेशानियों का सामना करना पड़ा था, उसे दूर करने का कोई उपाय नहीं किया गया है। सेक्टर-48 के अस्पताल में न तो डॉक्टर की तैनाती है न ही अन्य पैरा-मेडिकल स्टाफ की। इसके संचालन की जिम्मेदारी जीएमसीएच-32 को दी गई है लेकिन 6 दिसंबर से चल रहे रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से जीएमसीएच-32 इन दिनों खुद ही बंद होने की कगार पर आ गया है।

यहां इतने बेड हैं आरक्षित 
  • सरकारी और निजी अस्पताल में ऑक्सीजन बेड                  251
  • सरकारी और निजी अस्पताल में बिना ऑक्सीजन वाले बेड   19
  • सरकारी और निजी अस्पतालों में कोविड आईसीयू बेड          19
  • सरकारी और निजी अस्पतालों में वेंटीलेटर बेड                    101
तीसरी लहर से बचाव की तैयारी हर स्तर पर पूरी है। जीएमसीएच-32, जीएमएसएच-16, सेक्टर-48 और पीजीआई में कोविड वार्ड के साथ ही जगह-जगह कोविड केयर सेंटर भी तैयार हैं। जनवरी के पहले हफ्ते तक दोनों ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट भी शुरू हो जाएंगे। -यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव 
तीसरी लहर से बचाव की तैयारी के लिए हमारे पास काफी समय था। उस दौरान हमें सभी व्यवस्थाएं चौकस कर लेनी चाहिए थी। अब तैयारी करने का नहीं, बचाव का समय आ गया है। -डॉ. आरएस बेदी, डब्ल्यूएचओ के पूर्व परामर्शदाता
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