टीकाकरण का लक्ष्य भी रह गया अधूरा
कोरोना टीकाकरण की शुरुआत 16 जनवरी 2021 को की गई थी। इसके अंतर्गत पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाया गया। उसके बाद धीरे-धीरे अन्य लोग भी अभियान से जुड़ते गए। अभियान के अंतर्गत शहर की लक्षित लाभार्थियों को पहली खुराक लगाने का लक्ष्य 14 अगस्त 2021 को पूरा कर लिया गया है लेकिन दूसरी खुराक का लक्ष्य पूरा करना स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। प्रशासन ने लाभार्थियों को आकर्षित करने के लिए लकी ड्रा तक का उपाय आजमा लिया है लेकिन उसमें भी कुछ खास सफलता नहीं मिल सकी है। लगभग 20 प्रतिशत आबादी को अब तक दूसरी खुराक नहीं लग पाई है।
जीएमएसएच-16 में लगाया गया ऑक्सीजन प्लांट।
कुछ यूं है टीकाकरण का ग्राफ
- हेल्थ केयर वर्कर: पहली खुराक 103.96 प्रतिशत, दूसरी खुराक 96.09
- फ्रंट लाइन वर्कर: पहली खुराक 215.65 प्रतिशत, दूसरी खुराक 353.58 प्रतिशत
- 18 साल से ऊपर के लाभार्थी: 104.36 प्रतिशत और दूसरी खुराक 82.16 प्रतिशत
कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने समय रहते हुए इस कमी को दूर करने का निर्देश दिया था लेकिन तीसरी लहर की दस्तक हो जाने के बावजूद प्रस्तावित ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट शुरू नहीं हो पाए हैं। योजना के तहत जीएमएसएच-16 और जीएमसीएच-32 में 800-800 एलपीएम के दो प्लांट लगाए जाने थे। प्रशासन भी उसे दिसंबर के दूसरे हफ्ते तक शुरू करने का दावा कर रहा था लेकिन अब तक कंपनी ने अस्पतालों का दौरा भी नहीं किया है। प्लांट लगाना और शुरू होना तो दूर की बात है।
यहां है इतनी ऑक्सीजन की व्यवस्था
पीजीआई: दो हजार एलपीएम
जीएमएसएच-16: 500 एलपीएम
जीएमसीएच-32: एक हजार एलपीएम
सेक्टर-48 अस्पताल: 100 एलपीएम
तीसरी लहर में बच्चों पर मंडराते खतरे को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने 32 बेड के आईसीयू अस्पताल के साथ ही दो 20-20 बेड के ऑक्सीजन यूनिट बनाने को कहा था। इसके अंतर्गत सेक्टर-45 और 22 के सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन बेड की यूनिट तो स्थापित कर दी गई है लेकिन आईसीयू अस्पताल की योजना अब भी ठंडे बस्ते में है। यह अस्पताल जीएमएसएच-16 के नर्सिंग हॉस्टल के खाली पड़े भवन में बनाया जाना था लेकिन हॉस्टल अब तक वैसे ही खाली पड़ा हुआ है, जबकि यह कार्य योजना तीन महीने पहले तैयार की गई थी।
सेक्टर-48 अस्पताल में भी नहीं बदली व्यवस्था
दूसरी लहर के दौरान बेड कम पड़ने पर प्रशासन ने सेक्टर-48 के 100 बेड के अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाया था। अब भी वही व्यवस्था लागू है लेकिन दूसरी लहर में जिन परेशानियों का सामना करना पड़ा था, उसे दूर करने का कोई उपाय नहीं किया गया है। सेक्टर-48 के अस्पताल में न तो डॉक्टर की तैनाती है न ही अन्य पैरा-मेडिकल स्टाफ की। इसके संचालन की जिम्मेदारी जीएमसीएच-32 को दी गई है लेकिन 6 दिसंबर से चल रहे रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से जीएमसीएच-32 इन दिनों खुद ही बंद होने की कगार पर आ गया है।
यहां इतने बेड हैं आरक्षित
- सरकारी और निजी अस्पताल में ऑक्सीजन बेड 251
- सरकारी और निजी अस्पताल में बिना ऑक्सीजन वाले बेड 19
- सरकारी और निजी अस्पतालों में कोविड आईसीयू बेड 19
- सरकारी और निजी अस्पतालों में वेंटीलेटर बेड 101
तीसरी लहर से बचाव की तैयारी हर स्तर पर पूरी है। जीएमसीएच-32, जीएमएसएच-16, सेक्टर-48 और पीजीआई में कोविड वार्ड के साथ ही जगह-जगह कोविड केयर सेंटर भी तैयार हैं। जनवरी के पहले हफ्ते तक दोनों ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट भी शुरू हो जाएंगे। -यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव
तीसरी लहर से बचाव की तैयारी के लिए हमारे पास काफी समय था। उस दौरान हमें सभी व्यवस्थाएं चौकस कर लेनी चाहिए थी। अब तैयारी करने का नहीं, बचाव का समय आ गया है। -डॉ. आरएस बेदी, डब्ल्यूएचओ के पूर्व परामर्शदाता