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हरियाणाः विवादों में घिरी एचसीएस की प्राथमिक परीक्षा, विरोध के बाद मुख्य एग्जाम स्थगित

Tue, 25 Jun 2019 12:57 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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आवेदकों ने किया प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा में एचसीएस (एग्जीक्यूटिव) की परीक्षा विवादों में घिर गई है। एचसीएस की प्राथमिक परीक्षा को लेकर आवेदकों द्वारा किए जा रहे विरोध के मद्देनजर हरियाणा लोक सेवा आयोग ने इस पद के लिए होने वाले मुख्य एग्जाम को तुरंत प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। हालांकि आयोग ने इस परीक्षा को स्थगित करने का आधार प्रशासनिक कारण बताए हैं।

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मगर आवेदक इस पद की प्राथमिक परीक्षा में कई तरह की गड़बड़ियों को लेकर लगातार झंडा बुलंद किए हुए हैं। यह परीक्षा जुलाई के पहले हफ्ते में आयोजित कराई जानी थी। लेकिन अब आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा का शेड्यूल भविष्य में दोबारा तय किया जाएगा और इसकी सूचना वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी जाएगी।

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दरअसल, हरियाणा में यह परीक्षा लंबे समय से पेंडिंग चल रही थी। आयोग ने अब इस एचसीएस एग्जीक्यूटिव की प्राथमिक परीक्षा विगत माह आयोजित करवाई थी। लेकिन इस परीक्षा के दौरान पूछे कई सवालों और प्रश्न पत्र पर कई आवेदकों ने एतराज जताया है।

आवेदकों का आरोप है कि इस प्रश्न पत्र में न केवल कई प्रश्न आउॅट ऑफ सिलेबस थे, बल्कि पंद्रह के करीब प्रश्न पुराने प्रश्न पत्रों में से ही हुबहू रिपीट कर दिए गए।

आठ के करीब प्रश्न ऐसे थे, जिनके दो-दो उत्तर दिए गए। इतना ही नहीं आवेदकों का कहना था कि कई प्रश्न तो ऐसे थे, जो एचसीए एग्जाम लेवल के न होकर किसी लिपिकीय परीक्षा स्तर के थे।

आवेदकों के अनुसार इस तरह प्रश्न पत्रों में कई तरह की त्रुटियां थी, जिस पर आवेदकों को भारी रोष था। इसी को लेकर सोमवार को आवेदकों ने पंचकूला स्थित हरियाणा लोक सेवा आयोग के कार्यालय के समक्ष सत्याग्रह करते हुए आयोग के डिप्टी सेक्रेटरी को ज्ञापन भी सौंपा था। 

इसके साथ-साथ आवेदकों ने हाल ही में हुई नायब तहसीलदार की परीक्षा के दौरान हुए पेपर लीक का मुद्दा भी डिप्टी सेक्रेटरी के समक्ष उठाते हुए इस परीक्षा को भी रद करने की मांग की।

आवेदकों का कहना था कि जब इस पद के लिए पेपर लीक हो गया और आरोपियों को पुलिस ने पकड़ भी लिया है तो आयोग क्यों इस परीक्षा से संबंधित आगामी प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है। 

आवेदकों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे नायब तहसीलदार की परीक्षा को भी रद्द कर, इसे दोबारा कराएं। आवेदकों के अनुसार अगर सरकार उनकी मांग पर गौर नहीं करती तो मजबूरन हाईकोर्ट में जाने के अलावा विकल्प नहीं बचता है।
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